चीन ने दिया तोहफा: इन चीजों पर लगाई गई रोक हुई स्थगित, व्यापारियों में खुशी की लहर

दुनिया

चीन 
चीन ने गुरुवार को घोषणा की कि वह इस महीने की शुरुआत में घोषित किए गए कुछ निर्यात प्रतिबंधों (जिनमें रेयर अर्थ मटेरियल्स (दुर्लभ धातुएं) भी शामिल हैं) को एक साल के लिए स्थगित करेगा। यह फैसला वैश्विक बाजारों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि चीन दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ सप्लायर है। बता दें कि यह कदम चीन की रणनीतिक और आर्थिक नीति में एक अस्थायी नरमी के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले महीनों में वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, 'चीन 9 अक्टूबर को घोषित संबंधित निर्यात नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन को एक वर्ष के लिए निलंबित करेगा और इस अवधि के दौरान इन नीतियों पर अध्ययन कर उन्हें और परिष्कृत करेगा।'

क्या है डिटेल
बता दें कि चीन ने 9 अक्टूबर को नई निर्यात नियंत्रण नीतियां लागू करने की घोषणा की थी, जिनके तहत रेयर अर्थ से जुड़ी कई तकनीकों और सामग्रियों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाया जाना था। इन धातुओं का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोनों, पवन टर्बाइनों, रक्षा उपकरणों और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीकी उत्पादों में होता है। चीन द्वारा लगाए गए इन नियंत्रणों से अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ जैसे देशों में चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि ये देश उच्च तकनीकी उत्पादन के लिए चीन से आने वाले रेयर अर्थ तत्वों पर काफी हद तक निर्भर हैं।

क्या है चीन की मंशा
जानकारों का मानना है कि चीन का यह कदम राजनयिक लचीलापन दिखाने और अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित करने का प्रयास है। संभवतः बीजिंग अब यह देखना चाहता है कि इन नियंत्रणों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर क्या असर पड़ता है, इसके बाद ही वह अंतिम नीति लागू करेगा। रेयर अर्थ उद्योग पर चीन का लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक नियंत्रण है। हाल के वर्षों में, चीन ने इन संसाधनों को 'नेशनल एसेट' बताते हुए इनके निर्यात पर कड़े नियम लागू किए हैं ताकि घरेलू उद्योग को प्राथमिकता दी जा सके और संवेदनशील तकनीकों के लीक होने से बचा जा सके। हालांकि, अब एक साल के लिए प्रतिबंध स्थगित करने के फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय न केवल वैश्विक व्यापार तनाव को कम कर सकता है, बल्कि चीन और पश्चिमी देशों के बीच संवाद का रास्ता भी खोल सकता है।

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