सिरोही
जिले के अजारी स्थित मार्कण्डेश्वर धाम में शुक्रवार को आयोजित भाजपा के आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के दौरान वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों का घेराव करते हुए तीखे सवाल दागे और प्रस्तावित खनन योजना के खिलाफ खुलकर रोष जताया।
सुबह 10 से शाम 5 बजे तक सैकड़ों ग्रामीण अजारी के घांची समाज धर्मशाला के बाहर डटे रहे और नारेबाजी करते रहे। बाद में भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल विधायक के साथ धरना स्थल पहुंचा और वार्ता की। नेताओं ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि खनन परियोजना को निरस्त करवाने के लिए मुख्यमंत्री से बातचीत की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि जयपुर स्थित एक कंपनी द्वारा लगभग 800.99 हैक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन परियोजना प्रस्तावित है। इसके विरोध में आमजन पिछले डेढ़ महीने से आंदोलनरत हैं लेकिन इस दौरान कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि जनता के बीच नहीं पहुंचा, जिससे आक्रोश और बढ़ गया है।
इसी के चलते भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर विधायक समाराम गरासिया, सांसद लुंबराम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी और पिंडवाड़ा प्रधान नितिन बंसल पहुंचे ग्रामीणों ने घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
ग्रामीणों ने सवाल किया कि जब जनता डेढ़ महीने से सड़कों पर है तो इतने दिन से नेता कहां थे? खनन परियोजना को निरस्त करने के लिए सरकार क्या कर रही है? जनता के सवालों का जवाब देने में नेता असमर्थ दिखे और प्रधान नितिन बंसल तो बिना जवाब दिए ही लौट गए।
ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधान ने पहले दिए गए ज्ञापन को नजरअंदाज किया। वहीं भाजपा जिला मंत्री पवन राठौड़ के वाटेरा गांव में 500 करोड़ रुपये देकर लोगों को चुप कराने वाले कथित बयान को लेकर भी भाजपा जिलाध्यक्ष से जवाब मांगा गया।
कार्यक्रम के दौरान अंदर मंच पर भाजपा नेता दाल-बाटी-चूरमा का आनंद ले रहे थे, जबकि बाहर आंदोलनरत ग्रामीण बिस्किट खाकर दिन गुजार रहे थे। नेताओं के इस रवैये ने उनकी संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़ा कर दिया।
भाजपा जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस परियोजना को रद्द करवाने की मांग रखेंगे और संघर्ष समिति की उनसे भेंट करवाएंगे। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह खनन परियोजना लागू होती है तो खेती-बाड़ी, जलस्रोत और पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा।
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