कुख्यात अपराधी फहीम खान की रिहाई पर झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को मिला निर्देश

राज्य

रांची

वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। पिछले 22 वर्षों से भी अधिक समय से 75 वर्षीय फहीम खान जेल में कैद है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए 6 सप्ताह के भीतर उसे जेल से रिहा करने को कहा है।

न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि छह सप्ताह के भीतर फहीम खान को जेल से रिहा किया जाए। गैंगस्टर फहीम खान की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने पैरवी करते हुए दलील दी कि फहीम की उम्र अब 75 वर्ष से अधिक हो चुकी है। वह 22 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद है। इस दौरान वह दिल और गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि उसकी उम्र और सेहत को ध्यान में रखते हुए उसे रिमिशन सेंटेंस (सजा में छूट) के तहत रिहा किया जाए। वहीं, अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हेमंत सरकार को यह आदेश पारित किया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद फहीम खान के परिवार में खुशी का माहौल है। उनके बेटे इकबाल खान ने पिता की रिहाई की खबर मिलते ही परिवार के सदस्यों के साथ मिठाई बांटकर जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज उन्हें न्याय मिला है। वहीं, बता दें कि फहीम खान इस समय जमशेदपुर स्थित घाघीडीह जेल में बंद है। उसने 29 नवंबर 2024 को झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रिहाई की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार ने इस मामले में एक रिव्यू बोर्ड गठित किया था, जिसमें फहीम खान को 'समाज के लिए खतरा' बताते हुए उसके रिहाई से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि 1989 में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या के मामले में फहीम खान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 2009 से वे जेल में बंद थे। 10 मई 1989 की रात सगीर हसन सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में पुलिस ने फहीम खान सहित तीनों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। इसके बाद 15 जून 1991 को सेशन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, लेकिन बिहार सरकार ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए फहीम खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 21 अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। गवाहों के अनुसार, सगीर अपने दोस्त आलमगीर के घर के बाहर बैठा था, तभी फहीम खान अपने साथी छोटना उर्फ करीम खान और अरशद के साथ वहां पहुंचा और इसके बाद फहीम ने सगीर के सिर में गोली मार दी थी।

 

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