एसएएफ ट्रैवल बिल घोटाले पर अब भी सवाल बरकरार, आरक्षक की मौत के मामले में न्याय की प्रतीक्षा

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आरक्षक की जान तक लेने वाला एसएएफ का चर्चित ट्रैवल बिल घोटाला आज भी न्याय मांग रहा 

एसएएफ की 6वीं बटालियन में आरक्षक ट्रैवल बिल घोटाले के पहले करोड़ों का मेडिकल बिल घोटाला भी हुआ था

6वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट सुबोध लोखंडे के संरक्षण में बाबू सत्यम शर्मा का बड़ा खेल

बिल लगाने वाला दोषी और आहरण स्वीकृत करने वाले निर्दोष

अजब गजब खेल
सतना

आरक्षकों के करोड़ों के ट्रैवल बिल क्या महज आरक्षक फर्जीवाड़ा कर पास करवा सकता है।जब चिन्हित आरक्षकों के नाम पर लगातार लाखों के बिल लग रहे थे तब उसकी जांच करने वाला संबंधित शाखा का बाबू और पूरे मामले में आहरण के प्रभारी डीडीए अधिकारी इसमें दोष से कैसे बच सकते हैं।अजब गजब जांच जिसमें बिल की जांच करने वाला और बिल स्वीकृत कर उस पर दस्तखत करने वाला अधिकारी पाक साफ निर्दोष और महज बिल लगाने वाले 12 आरक्षक दोषी।

जिस जोड़ी ने खेला पूरा खेल उसको कैसे क्लीनचिट
जिनको इस पूरे मामले का सुपरविजन करना था,उस पर ही संबंधित शाखा के बाबू को शह देने और उसी की शह में ये करोड़ों के बिल लगने के गंभीर आरोप हैं।जानकारों की मानें तो असिस्टेंट कमांडेंट सुबोध लोखंडे और बाबू सत्यम शर्मा दोनों छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं और पूर्व से परिचित हैं।इनकी नजदीकियों को बटालियन में जानते सब हैं लेकिन कार्यवाही के डर से कोई बोलता कुछ भी नहीं
बाबू विशेष पर असीम कृपा

6वीं बटालियन में जब पारदर्शिता बताते हुए सभी बाबुओं की टेबल रोटेशन के तहत कुर्सी बदली गई तब भी असिस्टेंट कमांडेंट सुबोध लोखंडे की असीम कृपा से सत्यम शर्मा को कोई चाह कर भी हिला नहीं पाया।सत्यम शर्मा ने उसी कुर्सी अपर बैठ कर पूरे खेल को अंजाम दिया लेकिन वो जांच में पाक साफ निकला महज इसलिए क्योंकि उस पर अपने कथित साहब सुबोध लोखंडे के इशारे पर पूरा खेल करने के आरोप हैं।जानकारों की मानें तो सुबोध लोखंडे और सत्यम शर्मा की कॉल डिटेल की पूरी CDR निकाली जाएगी तो पूरे मामले की पूरी सत्यता सामने आ जाएगी।जानकारों की मानें तो इनके बैंक अकाउंट्स के साथ साथ इनके चिन्हित रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट्स को खंगालने की आवश्यकता है जिससे इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो जाएगा

मेडिकल बिल घोटाले में भी  सुबोध लोखंडे ही डीडीए थे
6वीं बटालियन में पूर्व के चर्चित मेडिकल बिल घोटाले के समय भी बटालियन में सुबोध लोखंडे ही बतौर डीडीए थे।उस समय भी पात्रता से अधिक के बिल लगाकर करोड़ों की राशि का आहरण किया गया था।दोनों ही घोटाले के तार आपस में जुड़े हैं क्योंकि इनके मुख्य कलाकार वही लोग हैं।

कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी के मौन पर भी सवालिया निशान
जानकारों की मानें तो 6वीं बटालियन के कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी का करीबी बन कर सुबोध लोखंडे पूरे कारनामों को अंजाम दे रहे है।अब जब पूरे मामले के कथित सूत्रधार सुबोध लोखंडे स्वयं उसी बटालियन में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट पदस्थ हैं तो उनके होते हुए किसी निष्पक्ष जांच की आशा करना ही बेमानी है।अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब दोनों घोटाले में इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी सब जानकर मौन क्यों हैं।सिद्धार्थ चौधरी के मौन पर भी गंभीर सवालिया निशान उठ रहे हैं।अब देखना यह होगा कि विभाग के आला अधिकारी इस जुगल जोड़ी के कारनामों की जांच किसी जिम्मेदार अधिकारी से करवा कर करोड़ों के इन घोटालों का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे या अन्य मामलों की तरफ छोटे लोगों पर कार्यवाही कर मामले का पटाक्षेप कर दिया जाएगा।

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