भोपाल
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में पिछले पाँच वर्षों के वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय की वर्ष 2019–20 से 2023–24 तक की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने और अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की गई है। ज्ञापन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा सौंपा गया है। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और वित्तीय लेन-देन में बड़े पैमाने पर आरोप सामने आए हैं।
उठाए गए प्रमुख मुद्दे
– छात्रों से जुड़े कोष के दुरुपयोग की आशंका।
– बिना अधिकृत आदेश के भारी वित्तीय लेन-देन।
– कई बैंक खातों और एफडी के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियाँ।
– एफडी समय से पहले तुड़वाने और राशि के स्थानांतरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं।
– बैंक द्वारा पेनल्टी काटे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
– 100 करोड़ रुपए से अधिक के कॉरपस फंड के उपलब्ध न होने का आरोप।
– वित्तीय लेन-देन पर इंटरनल कंट्रोल और SOP जैसी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।
मुख्य मांगें
1. पांच वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए।
2. सभी आर्थिक अनियमितताओं की CBI से विस्तृत जांच कराई जाए।
3. विश्वविद्यालय में धारा 54 लागू कर प्रशासनिक प्रबंधन राज्य शासन के अधीन किया जाए।
4. संचालन सुचारू रखने के लिए विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रों में विभाजित करने का सुझाव भी दिया गया है।
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