टोंक
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने SIR (मतदाता सूची सुधार अभियान) और कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग ने सभी फॉर्म 4 दिसंबर से पहले भरने की समयसीमा तय की है। पायलट ने कहा, “वे चाहते हैं कि SIR यहीं जल्दी पूरी हो जाए, जैसे बिहार में किया गया। लेकिन हम इसमें सावधानीपूर्वक कार्रवाई कर रहे हैं। मैंने हमेशा देखा है कि भाजपा के नेता, गृहमंत्री और प्रधानमंत्री कहते रहे हैं कि अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना जरूरी है। अगर कोई अवैध रूप से देश में रह रहा है, तो उसे देश से बाहर निकाला जाए। लेकिन मुझे बताइए, पिछले 11 वर्षो में भारतीय सरकार ने कितने अवैध प्रवासियों को देश से निकाला?”
सचिन पायलट ने आगे कहा, “चुनाव आते हैं और प्रवासियों का नाम लेते हैं, लेकिन आखिर में किसके वोट काटने की कोशिश हो रही है? गरीब, पिछड़े, दलित और आदिवासी। संविधान ने इन लोगों को अधिकार दिए हैं, और अगर उनके नाम हटाए जाते हैं, तो लोकतंत्र में इससे बड़ा पाप और क्या होगा। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मेहनत करनी चाहिए कि 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर नागरिक, जिसे वोट का अधिकार है, उससे कोई वंचित न हो। यह देश में पहली बार SIR नहीं हो रहा है। कई BLO (बुनियादी स्तर के अधिकारी) मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या कर रहे हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि काम निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।”
कर्नाटक में मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रहे विवाद पर पायलट ने कहा, “जो आप देख रहे हैं और सुन रहे हैं, मामला कुछ और है। दोनों, राज्य अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने सरकार बनाने के लिए मेहनत की। वे इसे साथ में चला रहे हैं और साथ में इसे दोबारा सफल बनाएंगे।” सचिन पायलट ने यह भी जोर देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
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