सैलजा का गंभीर आरोप: लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता गिराने की कोशिश जारी

राज्य

चंडीगढ़ 
पूर्व केंद्रीय मंत्री व सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि आज देशभर में यह गंभीर चिंता उभरकर सामने आ रही है कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख लगातार कमजोर की जा रही है। संसद से लेकर सड़कों तक, जनता और जनप्रतिनिधि दोनों यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बनाई जा रही हैं जिनसे संस्थाओं की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो। देश की जनता अब सवाल पूछ रही है और सरकार को इन सवालों के जवाब देने होंगे।

मंगलवार को चंडीगढ़ से जारी एक ब यान में सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार राजनीतिक ड्रामेबाजी के सहारे शासन चलाने की कोशिश कर रही है। उनकी कार्यप्रणाली ने उन संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, जिन्हें वर्षों की कड़ी मेहनत और संवैधानिक मूल्यों की नींव पर खड़ा किया गया था। सांसद ने कहा कि शासन का मूल आधार काम और समय पर डिलीवरी होता है, न कि दिखावा और भटकाव की राजनीति।

जहां डिलीवरी नहीं होती, वहां जनता अपनी आवाज बुलंद करती है और यही आज पूरे देश में दिखाई दे रहा है। कुमारी सैलजा ने बिहार सहित कई राज्यों के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आम नागरिक का चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था पर भरोसा कम होने लगे, तो यह केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बन जाता है।

सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उन संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर कर रही है जिन्हें बनाने में दशकों लगे हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कायम रखे, लेकिन दुर्भाग्य से आज इन्हें नियंत्रित करने और दबाव में लेने की कोशिशें साफ दिखाई देती हैं। इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रहार हो रहा है। कुमारी सैलजा ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का है।

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