राहुल जी ने कहा था ‘डरो मत’, सच बोला तो पार्टी से निकाल दिया: पूर्व विधायक का आरोप

राजनीती

नई दिल्ली 
कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने के बाद पार्टी से निकाले गए पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि आलाकमान हमारे साथ मुलाकात नहीं कर रहा है, तो हमने इस तरह से बात करने का सोचा। उन्होंने कहा कि सांसद राहुल गांधी ने सच बोलने के लिए कहा था, लेकिन सच बोलने पर पार्टी से निकाल दिया गया। मुकीम ने बुधवार को राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी को पत्र लिखा था।

मीडिया से बातचीत में मुकीम ने कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की बात दोहराई। उन्होंने कहा, 'मुझे पता चला है कि मुझे पार्टी से निकाल दिया गया है। मैंने बहुत सोच विचार के बाद सही कदम उठाया था। हम इतनी बड़ी पार्टी हैं, लेकिन हम राज्यों में लोगों से जुड़ नहीं पा रहे हैं। हम जीत नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस घटती जा रही है।'

उन्होंने कहा, 'ऐसे में एक सच्चे कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर हमने सोचा कि जब आलाकमान हमसे मुलाकात नहीं कर पा रहा है, तो हम ही उनसे संपर्क साधें। ऐसे में मैंने एक पत्र के जरिए अपनी बात सोनिया जी तक पहुंचाई। बाद में पत्र मीडिया में आ गया और जब उन्होंने मुझे पूछा, तो मैंने सच बता दिया। राहुल जी ने खुद ही कहा था कि डरो मत, डरो मत, जो सच है हम सच के खिलाफ लड़ेंगे। सत्य ही हमारा है, जो सत्य था हमने आलाकमान को बताया और हमें एक्सपेल होना पड़ा।'

उन्होंने कहा, 'मैं तब भी खुश हूं कि मेरी चिट्ठी की चर्चा बहुत जोर से हुई है। और यह चर्चा सोनिया जी के घर पर और संसद सदस्यों के बीच भी हुई है। उम्मीद है कि जो हैंडल हम पकड़ाएं हैं इनको, इसके ऊपर आगे कांग्रेस रिफॉर्म होगी, सुधार आएगी कांग्रेस में।'

पत्र में क्या था
पीटीआई भाषा के अनुसार, पूर्व विधायक ने एक सख्त पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच 'बढ़ती दूरी' को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। दावा किया कि वह स्वयं लगभग तीन वर्षों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाराबती-कटक से विधायक रहे और खुद को कांग्रेस का आजीवन समर्पित कार्यकर्ता बताने वाले मोहम्मद मुकीम ने पार्टी अध्यक्ष खरगे की नेतृत्व शैली पर भी सवाल उठाए।

मुकीम ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवरा, हिमंत बिस्वा सरमा जैसे कई उभरते युवा नेताओं ने इसलिए पार्टी छोड़ दी क्योंकि वे खुद को ‘उपेक्षित’, ‘नजरअंदाज’ और ‘अनसुना’ महसूस करते थे। उन्होंने सुझाव दिया कि वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी को केंद्रीय भूमिका में आकर प्रत्यक्ष और सक्रिय नेतृत्व संभालना चाहिए।

 

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