वसूली का NGO के जरिए चल रहा था नेटवर्क, टामन सिंह की पत्नी को गिरफ्तार करेगी CBI?

छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर.

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) 2021–22 भर्ती घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की ओर से कोर्ट में पेश की गई पूरक चार्जशीट और उसमें शामिल सरकारी गवाह के बयान से सामने आया है कि सोनवानी का कथित वसूली तंत्र एनजीओ से लेकर कोचिंग संस्थानों तक फैला हुआ था।

जांच में पहले यह तथ्य सामने आया था कि सोनवानी की पत्नी के एनजीओ जीवीएस में सीजीपीएससी के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए थे। इसी एनजीओ के माध्यम से बजरंग पावर से 50 लाख रुपये की वसूली की गई थी। अब जांच में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि उत्कर्ष ने अभ्यर्थियों से करीब सवा करोड़ रुपये वसूले।

सीबीआई और सरकारी गवाह के बयान के अनुसार, प्री परीक्षा पास कराने के बाद मेंस परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर उत्कर्ष ने प्रत्येक अभ्यर्थी से पांच से दस लाख रुपये की मांग की थी। पूरक आरोप पत्र में उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 16 फरवरी 2024 और 10 अप्रैल 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आए कि सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी और तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने वर्ष 2020 से 2022 के बीच अपने पदों का दुरुपयोग किया और अपने पुत्रों, बेटियों तथा रिश्तेदारों का चयन सुनिश्चित कराया।

सरकारी गवाह वी. चंद्राकर ने अदालत में बयान देते हुए बताया कि उनकी छोटी बहन भी सीजीपीएससी की तैयारी कर रही थी। वर्ष 2021–22 में एक रिश्तेदार के माध्यम से रायपुर के बोरियाकला स्थित पेट्रोल पंप पर उत्कर्ष चंद्राकर से मुलाकात हुई थी। उत्कर्ष ने खुद को प्रभावशाली अधिकारियों से जुड़ा बताते हुए परीक्षा पास कराने के लिए 50 से 60 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद कई अभ्यर्थियों को जोड़कर राशि जुटाई गई और उत्कर्ष को दी गई।

गवाह के अनुसार, प्री परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को डीडी नगर स्थित सिद्धि विनायक पैलेस ले जाया गया, जहां उन्हें प्री परीक्षा की प्रिंटेड कॉपी दी गई थी। प्री का परिणाम आने पर सभी अभ्यर्थी सफल हो गए, जिससे भरोसा और बढ़ गया। मेंस परीक्षा के लिए भी उत्कर्ष ने अतिरिक्त रकम की मांग की। नवापारा स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराने और बस की व्यवस्था कराई गई, लेकिन बाद में और पैसे नहीं देने पर सभी अभ्यर्थी मेंस परीक्षा में असफल हो गए।

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