चित्तौड़गढ़ में डिजिटल मायरा का आगमन, 151 गांव होंगे साक्षी, 20 बीघा में बनेगी गोकुल जैसी गोशाला

राज्य

चित्तौड़गढ़ 

 राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और गोसेवा के संस्कार सात समंदर पार भी फीके नहीं पड़े हैं। क्षेत्र के नपानिया गांव के युवाओं ने साबित कर दिया है कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, अपनी जड़ों को नहीं भूलता।

दुबई, अमरीका, लंदन और जापान जैसे 11 देशों में सफल करियर बना चुके इन युवाओं ने अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए करीब 20 लाख रुपए की लागत से एक विशाल नंदेश्वर गोशाला का निर्माण करवाया है। इस सामूहिक संकल्प की सिद्धि का उत्सव रविवार से नानी बाई के मायरा के साथ मनाया जाएगा।

टीस से जन्मा संकल्प: 11 हजार से शुरू हुआ कारवां

नपानिया गांव के युवा रोजगार के सिलसिले में केन्या, चीन और मुंबई जैसे शहरों में बसे हैं। अक्सर त्योहारों पर जब ये युवा गांव लौटते थे, तो सड़कों पर बेसहारा और चोटिल गोवंश को देखकर उनके मन में गहरी टीस उठती थी। यही दर्द पिछले वर्ष एक ठोस संकल्प में बदला। शुरुआत महज 11-11 हजार रुपए के अंशदान से हुई, लेकिन देखते ही देखते कारवां बढ़ता गया। प्रवासियों के साथ स्थानीय भामाशाहों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया।

11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी

इस गोशाला का शुभारंभ एक ऐतिहासिक उत्सव की तरह होगा। 11 जनवरी से चित्तौड़गढ़ के हरे कृष्णा प्रभु राकेश पुरोहित के सानिध्य में नानी बाई का मायरा कथा शुरू होगी। दुबई, अमरीका, यूके, केन्या, जापान और मस्कट सहित 11 देशों से प्रवासी भारतीय मायरा लेकर पहुंचेंगे। मकर संक्रांति को करीब 151 गांवों के श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित होंगे।

20 बीघा जमीन पर गोकुल' जैसा आशियाना

सांवलियाजी मार्ग पर करीब 20 बीघा भूमि पर इस गोशाला का निर्माण किया गया है। 15 लाख की लागत से विशाल शेड बनाया गया है ताकि गोवंश को हर मौसम से सुरक्षा मिले। किसी ने पशु खेळ (नांद) बनवाई, तो किसी ने बिजली कनेक्शन और समतलीकरण में श्रमदान किया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?

सड़कों पर चोटिल गोवंश को देख मन दुखी होता था। हमने तय किया कि अपनी कमाई का एक हिस्सा माटी और गोमाता को अर्पित करेंगे। गांव की एकता से ही यह संभव हुआ। – उदयलाल मेनारिया, प्रेम मेनारिया, संजय जाट और नपानिया के युवा

700 वर्ष पहले नरसीजी के भरोसे पर द्वारिकाधीश आए थे, आज उसी अटूट विश्वास के साथ नपानिया के युवा गोमाता के लिए भरोसे की कथा कर रहे हैं। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए मिसाल है। – पं. राकेश पुरोहित, प्रशासनिक संत

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