तीन संतान और फरारी वाले अब मैदान में नहीं उतर पाएंगे, झारखंड के निकाय चुनाव में आयोग सख्त

राज्य

रांची.

झारखंड में 2026 के नगर निकाय चुनाव की हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं, जिनके चलते कई संभावित उम्मीदवार सीधे चुनावी दौड़ से बाहर हो जाएंगे। आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि कुछ खास श्रेणियों के लोग मेयर, अध्यक्ष या वार्ड पार्षद के लिए नामांकन नहीं दाखिल कर पाएंगे।

ये हैं वो मुख्य नियम जो उम्मीदवारों को रोकेंगे
उम्र का खेल: वार्ड पार्षद बनने के लिए कम से कम 21 साल की उम्र जरूरी है, जबकि मेयर या अध्यक्ष पद के लिए न्यूनतम 30 साल। नामांकन के समय अगर उम्र कम हुई तो नामांकन फौरन रिजेक्ट!

दो बच्चे वाली लिमिट टूटेगी तो बाहर
अगर किसी की तीसरी या उससे ज्यादा संतान 9 फरवरी 2013 के बाद पैदा हुई है, तो वो चुनाव नहीं लड़ पाएगा। हालांकि, अगर तीसरा बच्चा पैदा होने के बाद नहीं रहा (मृत्यु हो गई) तो उम्मीदवार योग्य रहेगा। जुड़वां बच्चे और गोद लिए बच्चे भी गिनती में शामिल होंगे। 9 फरवरी 2013 से पहले दो से ज्यादा बच्चे थे और उसके बाद कोई और नहीं हुआ, तो कोई समस्या नहीं। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए है।

लगातार तीन बैठकें मिस कीं? अब बाहर
पहले निकाय में चुने गए कोई भी सदस्य अगर बिना वजह लगातार तीन बैठकों में गैरहाजिर रहा हो, तो अगले चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा। आयोग रिकॉर्ड चेक करेगा।

फरार हैं छह महीने से ज्यादा? नामांकन नामंजूर
किसी आपराधिक केस में अगर कोई छह महीने से अधिक समय से फरार घोषित है, तो वो चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेगा। पुलिस और कोर्ट रिकॉर्ड से जांच होगी।

खर्च का हिसाब नहीं दिया?
पिछले चुनाव में अगर किसी ने चुनाव खर्च का पूरा ब्योरा समय पर नहीं जमा किया या गड़बड़ी पाई गई, तो आयोग उसे अयोग्य घोषित कर सकता है।

अतिरिक्त सख्ती: नामांकन के वक्त अगर उम्मीदवार पर नगर निकाय या जिला प्रशासन का कोई होल्डिंग टैक्स, शुल्क या किराया बकाया है, तो नामांकन रद्द हो जाएगा। बकाया चुकाना अनिवार्य है, साथ में नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी लगेगा। गलत शपथ-पत्र देने पर सख्त कार्रवाई होगी।

झारखंड के 48-49 शहरी निकायों (नगर निगम, परिषद, पंचायत) में फरवरी-मार्च 2026 में चुनाव संभावित हैं। आरक्षण सूची भी जारी हो चुकी है, जैसे रांची में मेयर ST के लिए आरक्षित। आयोग ने सभी डीसी को इन नियमों का पालन कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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