स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार का बड़ा ऐलान, दिल्ली के अस्पतालों में बढ़ेगा मुफ्त इलाज

राज्य

नई दिल्ली
रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मुफ्त इलाज की सुविधा का फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने EWS (आर्थिक रूप से कमजोर) वर्ग की सालाना आय सीमा तो बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक कर दिया गया है। राज्य सरकार ने बताया कि निम्न आय वर्ग के लोगों को यह सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर दी गई जमीन पर बने शहर के अस्पतालों में मिलेगी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया।
 
9 साल पहले लिया था स्वतः संज्ञान
इस दौरान उच्च न्यायालय ने बताया कि सक्षम अथॉरिटी ने EWS सीमा की सालाना आय 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने को सहमति दे दी है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने यह बात 8 जनवरी को रेखा गुप्ता सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कही। कोर्ट सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुए एक मामले की सुनवाई कर रहा था।

सालाना 5 लाख रुपए तक की आय वाले उठा सकेंगे फायदा
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक सभी व्यक्ति अब जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद 5 लाख रुपए की निम्न आय वर्ग सीमा के तहत लाभ पाने के हकदार होंगे। सालाना आय की सीमा में यह बढ़ोतरी दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर आवंटित ज़मीन पर बने सभी पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों पर लागू होगी, जहां EWS नियम लागू हैं।'

इससे पहले तक वार्षिक इतनी इनकम वालों को ही मिलता था फायदा
अपने फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार व संबंधित विभागों को इस बढ़ोतरी का पर्याप्त प्रचार करने का निर्देश भी दिया ताकि नागरिकों को इसके बारे में पता चले और वे इसका लाभ उठा सकें। बेंच को बताया गया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज़ ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए 2 जनवरी को EWS की सालाना आय सीमा को 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का आदेश पारित किया था।

कोर्ट ने यह बात साल 2017 में स्वतः संज्ञान लेते हुए किए एक मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज में कमी की वजह से साल 2017 में शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था।

हाई कोर्ट ने पहले AIIMS के डायरेक्टर को डॉ. एसके सरीन समिति की सिफारिशों को लागू करने की जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिया था, जिसने स्वास्थ्य प्रणाली में कई कमियों की ओर इशारा किया था, जिसमें खाली पद, महत्वपूर्ण फैकल्टी सदस्यों की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इस मामले में वकील अशोक अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया था।

 

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