बरेला हादसा: मजदूरों की मौत से हिल गई एमपी, मुआवजे का ऐलान कर सरकार ने किया प्रयास

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  जबलपुर
जबलपुर के बरेला इलाके में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. मंडला जिले के बम्होरी गांव से काम के सिलसिले में निकले मजदूर इस हादसे का शिकार हो गए. जानकारी के मुताबिक तेज रफ्तार वाहन की टक्कर के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई. मौके पर चीख-पुकार गूंज उठी और कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए. इस हादसे में अब तक कई मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है.

कैसे हुआ हादसा?
मजदूर एक वाहन में सवार होकर जा रहे थे, तभी बरेला के पास तेज रफ्तार और लापरवाही से चल रहे दूसरे वाहन ने टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन सड़क से उतर गया. हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी. घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया.

घायलों का इलाज जारी, प्रशासन अलर्ट
हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया. घायलों को तत्काल इलाज मुहैया कराया गया. कुछ मजदूरों को गंभीर हालत में जबलपुर रेफर किया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है.

मंत्री राकेश सिंह ने जताया शोक, अधिकारियों से की बात
इस दुखद घटना पर राकेश सिंह, लोक निर्माण मंत्री, ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. जैसे ही उन्हें हादसे की जानकारी मिली, उन्होंने जबलपुर कलेक्टर और NHAI के अधिकारियों से तुरंत बात की. मंत्री सिंह ने साफ कहा कि सरकार घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं आने देगी और हर जरूरत का ध्यान रखा जाएगा.

मृतकों के परिजनों को राहत, तुरंत मुआवज़ा
एनएचएआई ने इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को प्रति मृतक 2-2 लाख रुपये की सहायता देने का फैसला किया है. इसमें से 1-1 लाख रुपये की राशि तत्काल स्वीकृत कर दी गई है, ताकि पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत मिल सके. बाकी सहायता भी जल्द दी जाएगी.

सरकार और NHAI का भरोसा
मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह सिर्फ मुआवज़ा नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाए. घायलों के इलाज का पूरा खर्च और आगे की जरूरतों में भी एनएचएआई सहयोग करेगा.

गांव में मातम, सवालों के घेरे में सड़क सुरक्षा
मंडला के बम्होरी गांव में इस हादसे के बाद मातम पसरा हुआ है. घरों में चूल्हे ठंडे हैं और परिवार सदमे में हैं. वहीं, एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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