बिहार में बन सकता है पहला शिव कॉरिडोर, गंगा की धारा मोड़ने की योजना, उज्जैन-वाराणसी की तर्ज पर

राज्य

भागलपुर.
 सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का मार्ग अब पूरी तरह से साफ हो गया है. लंबे समय से अटकी यह योजना अब भूमि समस्याओं से मुक्त होने के बाद आगे बढ़ने वाली है. भूमि विवाद के कारण लंबे समय से अटकी शिव कॉरिडोर योजना को प्रशासन और रेलवे के बीच जमीन एक्सचेंज के फैसले ने नई गति दी है. गंगा तट पर प्रस्तावित कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन रेलवे की थी. अब जिला प्रशासन ने बदले में रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे निर्माण का रास्ता पूरी तरह खुल गया है. जानकार कहते हैं कि श्रावणी मेले में कांवरियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था मिलेगी. यह परियोजना सुल्तानगंज की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है.
पुराने विवाद का ऐसे हुआ समाधान

प्रशासन और रेलवे के बीच भूमि आदान-प्रदान का निर्णय होने से अब कॉरिडोर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. गंगा किनारे सुल्तानगंज के प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर के पास बनना प्रस्तावित शिव कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए चिन्हित जमीन रेलवे की थी. इसी वजह से प्रशासन लंबे समय से कॉरिडोर निर्माण के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब जिला प्रशासन ने भूमि एक्सचेंज नीति के तहत रेलवे को उनकी जमीन के बदले अन्य जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे भूमि प्राप्ति की बाधा दूर हो जाएगी. प्रशासन की योजना है कि यह जमीन देने का प्रस्ताव जल्द ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया जाए और विभागीय मंजूरी के बाद औपचारिक भूमिस्थानांतरण (लैंड एक्सचेंज) शुरू किया जाएगा.
रेलवे को कौन-सी जमीन मिलेगी?

भारतीय रेलवे की लगभग 17 एकड़ 47.625 डिसमिल जमीन के बदले में प्रशासन तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने वाला है. जगदीशपुर हॉल्ट के पास 18.98 एकड़, बरारी के निकट 0.6 डिसमिल और सुल्तानगंज में एनएच के आईबी के पास 0.7 एकड़. इन तीन स्थानों की जमीन देकर रेलवे से मूल जगह की जमीन खाली करवाई जाएगी, ताकि कॉरिडोर और उसके आसपास की सुविधाओं का निर्माण संभव हो सके.

विभागीय मंजूरी के बाद निर्माण शुरू

शिव कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए जिला समाहर्ता ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को नि:शुल्क भू-स्थानांतरण का पत्र भेज दिया है. इसके बाद विभाग की मंजूरी मिलेगी और फिर भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तरह शिव कॉरिडोर का निर्माण संभव हो जाएगा, जिसका लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को इंतजार था.
गंगा की धारा मोड़ने का काम भी जारी

शिव कॉरिडोर के साथ-साथ सुल्तानगंज में गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है. जल संसाधन विभाग बड़ी परियोजना के तहत अरबों रुपये की लागत से इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है. इस योजना के पूरा होने पर गंगा नदी का बहाव पुराने रास्ते की ओर हो जाएगा और श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान का सुरक्षित स्थान सीधे पुरानी सीढ़ी घाट के पास मिलेगा. यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात माना जा रहा है.
सुल्तानगंज की बदलती पहचान

जानकारों का मानना है कि शिव कॉरिडोर सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह सुल्तानगंज की पहचान को बदलने वाली परियोजना साबित होगी. उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर विकसित यह कॉरिडोर यहां के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा. इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधाएं, बेहतर प्रबंध और सुरक्षा मिलेगी जिससे सुल्तानगंज धार्मिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल कर सकता है.
क्या आगे का काम होगा?

अब सिर्फ विभागीय मंजूरी और भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही भूमि की अदला-बदली और कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठेंगे. स्थानीय प्रशासन और योजना प्राधिकरण के अनुसार यह परियोजना सुल्तानगंज को धार्मिक पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के रूप में एक नया चेहरा देगा. शिव कॉरिडोर के निर्माण और गंगा की धारा मोड़ने की योजना के पूरा होने से सुल्तानगंज सिर्फ एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनेगा.

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