इंदौर में सफेद गिद्धों की वापसी, 9 साल बाद बढ़ी उनकी संख्या, पर्यावरण के लिए खुशखबरी

मध्य प्रदेश राज्य

इंदौर 

इंदौर के आकाश से लगभग गायब हो चुकी इजिप्शियन वल्चर यानी सफेद गिद्धों की प्रजाति एक बार फिर शहर के बाहरी इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। नेचर एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एंड अवेयरनेस सोसायटी द्वारा हाल ही में किए गए एक विस्तृत सर्वे में यह सुखद जानकारी सामने आई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ये दुर्लभ सफेद गिद्ध विशेष रूप से देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड और कंपेल के आसपास के क्षेत्रों में उड़ान भरते देखे गए हैं।

सर्वे के आंकड़ों में हुआ सुधार
देवगुराड़िया पहाड़ी का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इन गिद्धों का प्राकृतिक वास स्थल रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इनकी आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। एनजीओ एनडब्ल्यूसीएस द्वारा हर साल दिसंबर और जनवरी के महीनों में गिद्धों की गणना के लिए सर्वे किया जाता है। इस वर्ष के सर्वे में उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। करीब डेढ़ महीने तक चली इस प्रक्रिया के बाद क्षेत्र में 15 सफेद गिद्धों की पहचान की गई है। यदि पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो यह संख्या 7 अधिक है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह सुधार अभी शुरुआती है क्योंकि 9 साल पहले इसी क्षेत्र में गिद्धों की संख्या 83 हुआ करती थी।

नगर निगम आयुक्त को सौंपा जाएगा प्रस्ताव
गिद्धों के संरक्षण को लेकर संस्था अब ठोस कदम उठाने की तैयारी में है। एनडब्ल्यूसीएस के अध्यक्ष रवि शर्मा ने जानकारी दी कि वे लंबे समय से इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। संस्था की योजना है कि इंदौर नगर निगम मौजूदा डंपिंग यार्ड के अलावा शहर से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर एक ऐसा स्थान चिन्हित करे, जहां कचरे की प्रोसेसिंग खुले में की जा सके। इससे गिद्धों को कचरे में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने और भोजन प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव को लेकर जल्द ही निगमायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।

कचरा प्रबंधन और आबादी का गहरा संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या कम होने का मुख्य कारण खुले क्षेत्रों में कचरा डंपिंग का बंद होना था। चूंकि सफेद गिद्ध कचरे से अपना भोजन खोजने में सक्षम होते हैं, इसलिए भोजन की कमी ने इन्हें पलायन के लिए मजबूर किया। अब पिछले दो वर्षों में भोजन की उपलब्धता में मामूली सुधार होने से इनकी संख्या फिर बढ़ने लगी है। हालांकि, वन्यजीव प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कचरे की प्रोसेसिंग पूरी तरह से बंद और कवर्ड प्लांट्स में होने लगी, तो इन गिद्धों के अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। 

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