उज्जैन
सिंहस्थ को देखते हुए सरकार जहां उज्जैन में शिप्रा सहित सभी जल स्रोतों में साफ पानी के लिए योजनाएं बना रही है। दावे कर रही है, लेकिन सप्तसागर से दो साल में न तो कब्जे हटे और न सीवेज मिलना रुक पाया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जाहिर की है। कहा है, उज्जैन नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने पहले जारी निर्देशों का न तो सही से पालन किया और न प्रगति के संबंध में समय पर हलफनामा दाखिल किया।
ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश
निर्देशों का पालन करने में प्रतिबद्धता व ईमानदारी की कमी को एनजीटी हल्के में नहीं लेगा। ट्रिब्यूनल ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर व निगम कमिश्नर को निर्देशित कर तालाबों से अतिक्रमण हटवाएं। पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्रवाई करें। पर्यावरण विभाग के पीएस निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करें। शासन से भी दो हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
36 में से 18 बीघा पर अतिक्रमण
सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई कर यह निर्देश दिए। याचिका में बताया गया कि उज्जैन जिले के सप्तसरोवर-रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धनसागर, रत्नाकर सागर, विष्णुसागर और पुरुषोत्तम सागर का धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। राजस्व रिकॉर्ड में यह तालाब गोवर्धन सागर के नाम से खसरा 1281 पर 36 बीघा जमीन में दर्ज हैं। 18 बीघा पर अतिक्रमण हो चुका है। एनजीटी के अगस्त 2024 के आदेश में समिति से जांच कराई थी। अतिक्रमण और सीवेज मिलने की पुष्टि हुई थी।
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