टैक्सपेयर्स के लिए उम्मीदें बढ़ीं — बजट से पहले आर्थिक सर्वे में क्या कहा गया?

बिज़नेस

नई दिल्ली
केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले मोदी सरकार ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया है। इस सर्वे में साफ दिखता है कि सरकार देश के टैक्स सिस्टम को धीरे-धीरे आसान, पारदर्शी और भरोसे पर आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चाहे मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में बड़ी राहत हो या फिर GST सिस्टम में बदलाव, सर्वे बताता है कि आने वाले समय में टैक्स देना न सिर्फ आसान होगा बल्कि जेब पर बोझ भी कम पड़ेगा।
 
क्या है उम्मीदें
डायरेक्ट टैक्स की बात करें तो सबसे बड़ा ऐलान ₹12 लाख तक इनकम पर जीरो टैक्स का है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों की सालाना आय ₹12 लाख तक है, उन्हें अब कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा, जिससे टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़कर ₹12.75 लाख हो जाती है। सर्वे में कहा गया है कि इससे मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिली है और लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बच रहा है। इसके अलावा, नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे टैक्स नियम और भी सरल और समझने में आसान हो जाएंगे।

टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा
आर्थिक सर्वे यह भी दिखाता है कि देश में टैक्स देने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या FY22 में 6.9 करोड़ से बढ़कर FY25 में 9.2 करोड़ पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि यह सख्ती की वजह से नहीं, बल्कि बेहतर डिजिटल सिस्टम और अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने से संभव हुआ है। खास बात यह है कि अब टैक्स विभाग Nudge मॉडल अपना रहा है, जिसमें बिना डराए डेटा के जरिए लोगों को गलतियां सुधारने का मौका दिया जाता है। इससे ₹29,000 करोड़ से ज्यादा की विदेशी संपत्तियों का खुलासा हुआ है।

GST में बदलाव का असर
इनडायरेक्ट टैक्स यानी GST में भी बड़े बदलाव की झलक मिली है। सरकार GST 2.0 के तहत दो स्लैब सिस्टम (5% और 18%) की ओर बढ़ रही है। रोजमर्रा की चीजों जैसे साबुन, शैंपू, साइकिल पर GST घटाकर 5% किया गया है, जबकि दूध, ब्रेड और पनीर जैसी चीजों को टैक्स से बाहर रखा गया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर GST खत्म करने की बात सामने आई है, जिससे बीमा सस्ता होगा। कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वे 2025-26 यह संकेत देता है कि सरकार टैक्स सिस्टम को सख्ती नहीं, बल्कि सरलता, तकनीक और भरोसे के साथ आगे बढ़ाना चाहती है।

 

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