भारत की ऑब्जर्वर ने दमदारी से रखा शांति प्रस्ताव, ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पहुंचीं नामग्या खंपा

देश

वाशिंगटन.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत ने भी हिस्सा लिया। भारत की ऑब्जर्वर के तौर पर इसमें नामग्या शोदेन खांपा ने हिस्सा लिया जो कि वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की प्रभारी राजनयिक हैं। अमेरिका के शांति भवन में 'बोर्ड ऑफ पीस' की यह बैठक आयोजित की गई थी।

'डोनाल्ड जे ट्रंप इंस्टिट्यूट ऑफ पीस' में आयोजित इस बैठक में भारत की निरीक्षक के दौर पर नामग्या खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने सीधे तौर पर इस बोर्ड में शामिल नहीं हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि इस बैठक में 40 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कई देशों के राष्टराध्यक्ष भी उद्घाटन बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद बैठक में गए थे। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर देगा, जिसके सदस्यों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे 27 देश शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम की आलोचना की
संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक न्यूयॉर्क में गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन जब ट्रंप ने उसी दिन बोर्ड की बैठक की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे राजनयिकों की यात्रा प्रभावित हो सकती है, तो सुरक्षा परिषद की बैठक एक दिन पहले आयोजित कर दी गई। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था और ट्रंप की नई पहल के बीच एजेंडे के टकराव और समानांतर प्रयासों की संभावना है। वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करने की इस नई पहल की व्यापक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कुछ देशों में चिंता है कि कहीं यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को चुनौती देने या उसके समकक्ष बनने की कोशिश न करे। संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में शामिल पाकिस्तान एकमात्र ऐसा सदस्य है जिसने 'बोर्ड आफ पीस' की बैठक में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया है।

ब्रिटेन, इजराइल, जॉर्डन, मिस्र और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों ने भी सुरक्षा परिषद की इस बैठक में हिस्सा लिया। पिछले सप्ताह कई अरब और इस्लामी देशों ने अनुरोध किया था कि इनमें से कुछ देशों के अधिकारियों के वाशिंगटन रवाना होने से पहले गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दे पर चर्चा की जाए। संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने कहा, ''अधिग्रहण संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की योजना का भी उल्लंघन है और जारी शांति प्रयासों के लिए खतरा पैदा करता है।"

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