नई दिल्ली. चकाचौंध, भारी-भरकम खर्च और शाही शादियों के दौर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो युवा अधिकारियों ने सादगी की एक नई इबारत लिखी है। 2023 बैच के आईएएस अधिकारी माधव भारद्वाज और अदिति वार्ष्णेय ने बिना किसी शोर-शराबे और पारंपरिक आडंबर के एक-दूसरे का हाथ थामकर समाज को सादगी का संदेश दिया है।
18 फरवरी को राजस्थान के अलवर स्थित मिनी सचिवालय में इन दोनों अधिकारियों ने कोर्ट मैरिज की। इस विवाह की खास बात यह रही कि इसमें न कोई बैंड था, न कोई पुजारी और न ही कोई लंबी-चौड़ी बारात। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी की यह कानूनी प्रक्रिया अलवर की जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की मौजूदगी में संपन्न हुई। माधव और अदिति ने कलेक्टर के चैंबर में ही एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। इस सादे समारोह में केवल उनके परिवार के कुछ करीबी सदस्य ही मौजूद थे। जैसे ही अधिकारियों और कर्मचारियों को इस शादी की खबर मिली, वे भी इस खास पल के गवाह बनने के लिए वहां एकत्र हो गए। वर्तमान में माधव भारद्वाज अलवर में ही उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर तैनात हैं, जबकि अदिति वार्ष्णेय गुजरात के जामनगर में SDM के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
ट्रेनिंग से शुरू हुआ सफर
दोनों की प्रेम कहानी और साथ चलने का फैसला मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुआ। ट्रेनिंग के दौरान दोस्ती हुई और धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि न केवल उनके विचार मिलते हैं, बल्कि जनसेवा को लेकर उनका दृष्टिकोण भी एक जैसा है। इसी आपसी समझ और समान मूल्यों ने उनके बंधन को जीवन भर के रिश्ते में बदल दिया। उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि वे अपनी शादी में फिजूलखर्ची से बचेंगे।
अदिति वार्ष्णेय ने पहले ही प्रयास में हासिल की 57वीं रैंक
उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली अदिति ने अपनी स्कूली शिक्षा बिशप कॉनराड स्कूल से पूरी की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से बीए ऑनर्स किया। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन बीच में ही छोड़ दी थी। अदिति की सफलता की कहानी बेहद खास है क्योंकि उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 57वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने सामान्य अध्ययन के लिए कोई कोचिंग नहीं ली थी। अदिति ने इस उपलब्धि के साथ अपनी मां का वह सपना पूरा किया, जो वह खुद के लिए देखती थीं।
माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ बने अधिकारी
दूल्हे माधव भारद्वाज का सफर भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहा। कंप्यूटर साइंस में बीटेक (MNNIT प्रयागराज) और IIM अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद माधव माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान जब वे 'वर्क फ्रॉम होम' कर रहे थे, तब उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में वे मात्र 3 नंबरों से चूक गए, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने 536वीं रैंक हासिल की और देश सेवा के अपने सपने को सच कर दिखाया।
अदिति के पिता दिनेश वार्ष्णेय ने बताया कि हालांकि कोर्ट मैरिज सादगी से हुई है, लेकिन जल्द ही बरेली में एक पारंपरिक समारोह का आयोजन भी किया जाएगा ताकि रिश्तेदार और परिचित इस खुशी में शामिल हो सकें।
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