नई दिल्ली
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) ने खुलासा किया है कि भारत की लंबी दूरी की धाविका पूजा आत्माराम पिछले साल प्रतियोगिता के दौरान होने वाले डोप परीक्षण से पहले घबराकर भाग गई थीं और यह अपराध स्वीकार करने के बाद उन पर चार के बजाय तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
तीस वर्षीय पूजा 5000 मीटर और 10,000 मीटर स्पर्धाओं में भाग लेती हैं। उन्होंने 2024 में राजस्थान की तरफ से इंडियन ग्रां प्री दो में तीसरा स्थान हासिल किया था, जो उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पिछले साल 23 नवंबर को मुंबई में इंडियन ऑयल डब्ल्यूएनसी नेवी हाफ मैराथन जीतने के बाद उन्हें डोप टेस्ट के लिए चुना गया था।
एआईयू ने अपने फैसले में कहा, ‘‘दौड़ समाप्त होने के तुरंत बाद एक डोपिंग कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) और एक लीड डीसीओ ने इस एथलीट को मौखिक रूप से डोपिंग टेस्ट के लिए चुने जाने की सूचना दी थी। सूचना मिलने के बाद इस एथलीट ने डोपिंग कंट्रोल फॉर्म (डीसीएफ) पर हस्ताक्षर नहीं किए।’’
मौखिक सूचना मिलने के बाद एथलीट को फिनिश लाइन से डोपिंग कंट्रोल स्टेशन (डीसीएस) तक ले जाने के लिए एक सहायक साथ में था। इसी दौरान एथलीट सहायक से अलग होकर भीड़ में भाग गई।
इसमें कहा गया है, ‘‘पर्यवेक्षक ने एथलीट का पता लगाने की कोशिश की और तुरंत सूचित किया कि परीक्षण के लिए चुने जाने की मौखिक सूचना डीसीओ को दिए जाने के बाद एथलीट भाग गई। उन्होंने इस संबंध में दौड़ के निदेशक को भी जानकारी दी।’’
निदेशक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया। पूजा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई इसी वर्ष तीन फरवरी को शुरू की गई थी। आरोप की सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर ही उन्होंने अपने अपराध के लिए माफी मांग ली थी। इसके बाद एआईयू ने उसके चार साल के प्रतिबंध में से एक साल की छूट दी।
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