रंगों का जादू: जब जीवन के कैनवास पर खिलती हैं खुशियाँ

छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर

विशेष लेख : रंगों से बदलते जीवन के रंग

होली का त्यौहार रंगों की उमंग और खुशियों का संदेश लेकर आता है। इस बार छत्तीसगढ़ की बिहान दीदियां प्राकृतिक रंगों से न केवल होली को सुरक्षित बना रही हैं, बल्कि अपने जीवन में खुशहाली के नए रंग भी भर रही हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। प्राकृतिक फूलों, सब्जियों से बने ये रंग पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल हैं। सुगंध के लिए गुलाबजल और प्राकृतिक इत्र का उपयोग किया जाता है, जिससे रंगों की महक भी मन को भा जाती है।     
कांकेर जिले में आत्मसमर्पित माओवादियों के समूह ने भी पुनर्वास नीति के तहत हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य शुरू किया है। पुनर्वास शिविर में मानकी नेताम, सामको नुरूटी और डाली सलाम जैसे सदस्य पूरे उत्साह से गुलाल तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कार्य उन्हें आत्मसम्मान और स्थायी आजीविका दोनों दे रहा है। शासन की पुनर्वास नीति से भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यह सराहनीय पहल है।      

प्रदेश के रायपुर, कबीरधाम, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, नारायणपुर और कांकेर सहित अनेक जिलों में स्व-सहायता समूह हर्बल गुलाल का उत्पादन कर रहे हैं। कई समूह मंदिरों में अर्पित फूलों को एकत्र कर सुगंधित गुलाल बना रहे हैं। अबुझमाड़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं ने इसे अपनी पहचान बना ली है। बिहान योजना के तहत महिलाएं सरस मेला एवं क्षेत्रीय मेलों में स्टॉल लगाकर उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें 40 से 60 हजार रुपये तक का सीधा लाभ मिल रहा है। कई महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं।  

हर्बल गुलाल के अनेक लाभ हैं। यह त्वचा और आंखों के लिए सुरक्षित है, एलर्जी या जलन की आशंका नहीं होती। यह बायोडिग्रेडेबल है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता। हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण और पलाश में रक्त-शोधक विशेषताएं होती हैं, जो इसे और भी उपयोगी बनाती हैं। बाजार में इसकी कीमत 80 से 250 रुपये प्रति किलो तक है, जिससे यह आमजन के लिए भी सुलभ है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार वर्ष 2026 को महिला गौरव वर्ष के रूप में मना रही है। राज्य सरकार के प्रयास से 5 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिए चलाई जा रही महतारी वंदन योजना से लगभग 69 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह एक-एक हजार रूपए की राशि भी दी जा रही है। चालू बजट में लखपति दीदीयों को एक्सपोजर विजिट के लिए नई योजना भी लाई गई है। महिलाओं के सशक्तिकरण का यह प्रयास विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में सार्थक भूमिका निभाएगा। 

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