ईरानी युद्धपोत की मदद पर विवाद: क्या अमेरिका ने बनाया दबाव? श्रीलंकाई मंत्री ने तोड़ी चुप्पी

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कोलंबो
श्रीलंका ईरान के नाविकों के साथ अंतराष्ट्रीय कानून के तहत व्यवहार करेगा। अमेरिकी हमले के शिकार हुए ईरानी जहाज पर सवार यह नाविक फिलहाल श्रीलंका में रुके हुए हैं। श्रीलंका के एक मंत्री शनिवार को यह जानकारी दी। ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका, श्रीलंका पर दबाव डाल रहा है कि इन ईरानी नाविकों को उनके देश वापस न लौटने दे। हालांकि जब श्रीलंकाई मंत्री से अमेरिकी दबाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बता दें कि ईरानी जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था। इस हमले में कुछ नाविक मारे गए थे और कुछ घायल भी हुए थे।

दूसरे युद्धपोत को भी सुरक्षा
विदेश मंत्री विजिथा हिराथ ने नई दिल्ली में एक सम्मेलन को बताया कि श्रीलंका ईरानी फ्रिगेट आइरिस डेना के 32 नाविकों का कोलंबो की अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत ख्याल रख रहा है। उन्होंने कहाकि हमने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार सभी कदम उठाए हैं। श्रीलंका ने एक दूसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस बुशेहर, को भी सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। डेना पर हमले के एक दिन बाद इसके 219 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

इंजन समस्याओं से जुड़ी रिपोर्ट के बाद जहाज को श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित त्रिनकोमाली ले जाया गया। इस बीच, भारत ने शनिवार को कहा कि उसने तीसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस लावान, को भी अपने किसी बंदरगाह पर मानवीय आधार पर ठहरने की अनुमति दी थी, क्योंकि उसने भी परिचालन समस्याओं की सूचना दी थी। तीन जहाज भारत द्वारा मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने से पहले आयोजित की गई एक बहु-राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू का हिस्सा थे। भारतीय प्रधानमंत्री एस जयशंकर ने कहाकि मुझे लगता है कि यह मानवीय काम था और हम इसके तहत ही काम कर रहे थे।

 

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