लोकसभा में स्पीकर Om Birla को हटाने का प्रस्ताव, लंबी चर्चा के लिए 10 घंटे निर्धारित

देश

नई दिल्ली
लोकसभा में मंगलवार को उस समय जोरदार बहस छिड़ गई जब कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पेश होते ही सदन में प्रक्रिया और नियमों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली और आखिरकार सदन ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे दी। इस मुद्दे पर 10 घंटे की बहस तय की गई।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान 'पक्षपातपूर्ण रवैया' अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसे लेकर असंतोष बढ़ा। प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में एक नया विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी।

इस मुद्दे पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि अभी तक लोकसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जो सदस्य चेयर पर बैठे हैं, उन्हें स्पीकर की स्वीकृति से ही नामित किया गया है। इसलिए उनके द्वारा इस प्रस्ताव पर चर्चा कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बहस शुरू होने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा।

इस पर भाजपा की ओर से जवाब भी सामने आया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर के समान अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यवाही चला सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की बात का समर्थन किया और कहा कि नियम स्पष्ट रूप से चेयर को यह अधिकार देते हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है, जो एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बहस आगे बढ़ाने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही कौन संचालित करेगा।

इस दौरान भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो सदस्य चेयर पर बैठा है, उसे सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है।

जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर ने नोटिस में मौजूद शुरुआती तकनीकी गलतियों को ठीक करने में उदारता दिखाई और आवश्यक सुधारों की सूचना खुद जारी की। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। अंत में यह तय हुआ कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे तक चर्चा होगी।

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