Uniform Civil Code पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, संसद से कानून बनाने की अपील

देश

नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शरीयत कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संसद को विचार करना चाहिए।

कानूनी शून्य (Legal Vacuum) पैदा होने का खतरा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि यदि अदालत सीधे शरीयत कानून को खत्म कर देती है, तो इससे एक 'कानूनी शून्य' पैदा हो जाएगा। पीठ के अनुसार, ऐसी स्थिति में मुस्लिम विरासत (Inheritance) को नियंत्रित करने के लिए कोई वैकल्पिक कानून मौजूद नहीं रहेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग को सकारात्मक बताते हुए इसे विधायिका (Legislature) के पाले में डाल दिया।

हक और सुधारों के बीच संतुलन

सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सुधारों की प्रक्रिया में हमें यह ध्यान रखना होगा कि किसी समुदाय को उन अधिकारों से वंचित न कर दिया जाए जो उन्हें वर्तमान में मिल रहे हैं। वहीं, जस्तटिस बागची ने रेखांकित किया कि UCC लागू करने का अधिकार संसद के विवेक पर निर्भर है। उन्होंने कहा…

"एक पुरुष के लिए एक पत्नी का नियम फिलहाल सभी समुदायों पर समान रूप से लागू नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं कि कोर्ट सभी दूसरी शादियों को असंवैधानिक घोषित कर दे। हमें नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive प्रिंसिपल्स) को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।"

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry