देश में पहली बार: हरियाणा ने लागू की त्रि-भाषाई शिक्षा नीति, तीसरी भाषा अनिवार्य

राज्य

भिवानी.

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत त्रि-भाषाई सूत्र लागू करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही हरियाणा देश का पहला ऐसा बोर्ड बन गया है जिसने इस नीति को स्कूल स्तर पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

नई व्यवस्था के अनुसार अब कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को हिन्दी और अंग्रेजी के साथ एक अतिरिक्त भाषा पढ़नी होगी। यह तीसरी भाषा संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से चुननी होगी और इसे अनिवार्य बनाया गया है। बोर्ड अध्यक्ष डा. पवन कुमार और उपाध्यक्ष सतीश शाहपुर ने बताया कि इस फैसले से विद्यार्थियों के भाषाई कौशल में सुधार होगा और उन्हें अन्य राज्यों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। नई प्रणाली के तहत विद्यार्थियों को अब कुल 7 विषय पढ़ने होंगे, जिनमें 6 अनिवार्य और 1 वैकल्पिक विषय शामिल होगा। पास होने के लिए 6 विषयों में उत्तीर्ण होना जरूरी होगा। इसके साथ ही 'बैस्ट फाइव' की जगह अब 'बैस्ट सिक्स' फॉर्मूला लागू किया जाएगा।

शारीरिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों को 2 अनिवार्य भाषाओं में से एक चुनने की छूट दी जाएगी। साथ ही विशेष विद्यालयों में इंडियन साइन लैंग्वेज को अलग विषय के रूप में लागू किया जाएगा। बोर्ड कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए स्मार्ट पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करेगा। इन किताबों में क्यू. आर. कोड दिए जाएंगे जिन्हें स्कैन करने पर संबंधित विषय का वीडियो लैक्चर सीधे मोबाइल पर उपलब्ध होगा।

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