राजस्थान
राजस्थान की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा, जिसे एशिया का मैनचेस्टर कहा जाता है, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है. ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर यहां की करीब 80 से 90 हजार करोड़ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. करीब 100 साल पुरानी इस इंडस्ट्री में पहली बार इतने खराब हालात बने हैं. उद्योगपतियों के पास अब सिर्फ एक से दो सप्ताह का कच्चा माल ही बचा है, जिससे उत्पादन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
महंगा हुआ कच्चा माल, बढ़ी उत्पादन लागत
भीलवाड़ा में करीब 400 वीविंग यूनिट्स और 18 स्पिनिंग मिल्स हैं, जहां हर साल लगभग 125 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता है. यहां का सालाना कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है. लेकिन युद्ध के कारण पॉलिएस्टर फाइबर, केमिकल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है. रेड सी रूट महंगा होने से कंटेनर फ्रेट 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गया है, जिससे यार्न की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. कपड़े की लागत प्रति मीटर 12 से 14 रुपये तक बढ़ चुकी है.
गैस संकट से प्रोसेस हाउस ठप होने की कगार पर
भीलवाड़ा सहित पाली, बालोतरा और बाड़मेर के प्रोसेस हाउस गैस की कमी से बुरी तरह प्रभावित हैं. एक प्रोसेस हाउस में रोजाना करीब 250 किलो गैस की जरूरत होती है, जबकि कुल खपत 3 लाख किलो प्रतिदिन है. गैस की कमी के चलते 25 से ज्यादा प्रोसेस हाउस का काम लगभग ठप हो चुका है और आगे 80 प्रतिशत वीविंग यूनिट्स बंद होने का खतरा है.
निर्यात पर भी पड़ा असर, हजारों करोड़ के ऑर्डर अटके
मिडिल ईस्ट और यूरोप में निर्यात पर भी युद्ध का असर साफ दिख रहा है. करीब 5 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर अटक गए हैं, जबकि 800 से 1000 करोड़ रुपये का कारोबार पहले ही प्रभावित हो चुका है. हर साल अप्रैल से जून के बीच 5 से 6 करोड़ मीटर कपड़ा मिडिल ईस्ट भेजा जाता है, जो अब संकट में है. वहीं भेजे गए माल का भुगतान भी अटका हुआ है.
लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा
राजस्थान में 1800 से अधिक टेक्सटाइल यूनिट्स में करीब 18 से 20 लाख लोग काम करते हैं. भीलवाड़ा की 100 से ज्यादा यूनिट्स अब शिफ्ट कम करने की तैयारी में हैं. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो बड़े पैमाने पर रोजगार पर असर पड़ सकता है.
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