भोपाल
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू दो बच्चों की शर्त को खत्म करने की तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रख सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है। प्रदेश में फिलहाल दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति पर प्रतिबंध लागू है। यह प्रावधान वर्ष 1961 के नियमों और बाद में 2001 में किए गए संशोधनों के तहत लागू किया गया था। अब सरकार इस शर्त को समाप्त करने पर विचार कर रही है।
सभी विभागों में लागू होगा नियम
यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो सरकारी नौकरी के इच्छुक ऐसे अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकेगा जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं होने के कारण निर्णय टलता रहा। अब विभागीय स्तर पर सहमति बनने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे सभी विभागों में लागू किया जाएगा। हालांकि इस बदलाव का असर पहले से सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर किस तरह पड़ेगा, इस बारे में अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियम हटने के बाद भविष्य में होने वाली भर्तियों में इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही जिन अभ्यर्थियों को पहले इस नियम के कारण आवेदन से वंचित रहना पड़ता था, उन्हें भी मौका मिल सकेगा।
परिवारों को कैशलेस इलाज
राज्य सरकार के स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ अन्य सेवा नियमों में भी समय के अनुसार बदलाव किए जाएं। इसी क्रम में दो बच्चों की शर्त हटाने को प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसी के साथ सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे कर्मचारियों और उनके आश्रितों को करीब 20 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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