मुंबई पहुंचे 15,400 टन LPG गैस के साथ ‘ग्रीन आशा’ टैंकर, अब नहीं होगी गैस की किल्लत

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नवी मुंबई के समुद्री तट से एक राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) लेकर एक भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (Jawaharlal Nehru Port Authority) ने गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को बताया कि 15,400 टन एलपीजी लेकर आ रहा एक बड़ा जहाज नवी मुंबई के पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच चुका है. यह खबर इसलिए खास है, क्योंकि इस जहाज ने इस वक्त दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार किया है, जहां इस समय ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की वजह से भारी तनाव बना हुआ है। 

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने जानकारी दी है कि ग्रीन आशा (Green Asha) नाम का यह भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल पर पहुंच गया है. इस जहाज को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के उस विशेष हिस्से (बर्थ) पर खड़ा किया गया है, जिसका संचालन भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) मिलकर करते हैं. पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह इस तरह का पहला जहाज है, जो इतने खतरनाक माहौल के बावजूद वहां से निकलकर सीधे इस पोर्ट पर पहुंचा है. अधिकारियों का कहना है कि यह भारत के लिए एक बड़ी जीत जैसा है क्योंकि युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरना बहुत मुश्किल हो गया था ।

सुरक्षित हैं कर्मचारी और जरूरी सामान
इस पूरे मिशन की सबसे अच्छी बात यह रही कि जहाज पर मौजूद चालक दल (क्रू) के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं. जहाज में लदी 15,400 टन एलपीजी और खुद जहाज को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. पोर्ट अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा है कि ग्रीन आशा का सुरक्षित आना यह दिखाता है कि मुश्किल अंतरराष्ट्रीय हालातों और लड़ाई के बावजूद भारत अपनी समुद्री ताकत के दम पर देश के लिए जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने में सक्षम है. यह जहाज भारत में रसोई गैस की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था 

क्यों खास है यह पोर्ट और समुद्री रास्ता
नवा शेवा पोर्ट (Nhava Sheva Port) के नाम से मशहूर यह बंदरगाह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बहुत बड़ा रोल निभाता है. यहां से पूरे देश में गैस और तेल की सप्लाई की जाती है। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल और गैस की जरूरतें पूरी करता है, लेकिन ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने इस रास्ते को जोखिम भरा बना दिया है. ऐसे में भारतीय तिरंगे वाले जहाज का वहां से सुरक्षित निकल आना यह भरोसा दिलाता है कि भविष्य में भी भारत अपनी ऊर्जा सप्लाई को इसी तरह बरकरार रखेगा। 

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