नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अदालत में जजों के आचरण को लेकर अहम बातें कही हैं। शनिवार को न्यायपालिका में ईमानदारी के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार हो जाते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं है और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद आज ज्यूडिशियरी में शामिल अधिकारियों को बहुत अच्छा वेतन और सेवा शर्तें मिल रही हैं, इसलिए किसी भी तरह का अनैतिक आचरण अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जज लालच में आ जाता है, तो उसे सिस्टम से ही हटा दिया जाना चाहिए।”
प्रलोभन से बचना चाहिए- SC जज
SC जज ने आगे कहा कि एक जज को अपने वैध वेतन में खुश रहना चाहिए और किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न कर पाना न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखना भी शामिल है।
जस्टिस नागरत्ना ने फैसले लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक भी गलत फैसला न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकता है। उन्होंने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज में भी पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया, खासकर जिला न्यायपालिका में। वहीं उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की है कि वे अधिकारियों के लिए सहयोगी वातावरण बनाने की कोशिश करें।
AI के खतरों पर भी बोलीं जस्टिस नागरत्ना
इस दौरान ज्यूडिशियरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां वकीलों ने अदालत में एआई टूल्स से तैयार किए गए ऐसे कानून का हवाला दिया, जो थे ही नहीं। उन्होंने कहा है कि वकीलों को जिन फैसलों का वे हवाला देते हैं, उनकी सत्यता की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।
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