भोपाल
मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों और सरकार की नींद उड़ा दी है। साल 2025 में रिकॉर्ड 54 बाघों की मौत के मामले में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। इसमें बाघों को बचाने के लिए एक नई और हाईटेक सुरक्षा नीति का खुलासा किया गया है, जो अब रिजर्व की सीमाओं से बाहर भी लागू होगी।
रिजर्व के बाहर भी टाइगर की सुरक्षा
NTCA ने कोर्ट को बताया कि अब केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि उनसे सटे जंगलों, गलियारों और क्षेत्रीय डिवीजनों में भी वही सुरक्षा मिलेगी जो रिजर्व के अंदर उपलब्ध होती है। इसके लिए टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात यह है कि साल 2025-26 के पहले चरण के लिए मध्य प्रदेश के 8 फॉरेस्ट डिविजन को चुना गया है।
AI और आधुनिक हथियारों से होगी घेराबंदी
बाघों के अंगों की तस्करी और शिकार रोकने के लिए अब पुराने तरीके नहीं चलेंगे। NTCA ने राज्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और वायरलेस संचार को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इंटेलिजेंस गैदरिंग, स्ट्राइक फोर्स की तैनाती और अपराध का पता लगाने के लिए आधुनिक हथियारों के उपयोग पर जोर दिया गया है।
इन्वायलेट रहेगा कोर एरिया
हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38 V (4)(i) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि नेशनल पार्क और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों को इन्वायलेट रखा जाना अनिवार्य है। यानी बाघों के संरक्षण के लिए इन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह वर्जित रहेगा।
प्रोजेक्ट टाइगर के तहत हम अब उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां बाघ रिजर्व से बाहर निकलकर जा रहे हैं। इन कॉरिडोर क्षेत्रों में सुरक्षा को अभेद्य बनाना और AI का उपयोग करना हमारी प्राथमिकता है।
नंदकिशोर काले, सहायक महानिरीक्षक (वन), NTCA
गौरतलब है कि भारत फिलहाल दुनिया में बाघों का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 3,682 बाघ मौजूद हैं। एमपी में बाघों की संख्या 6% सालाना की दर से बढ़ रही है, लेकिन हालिया 54 मौतों ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है।
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