AAP ने दिल्ली में भाजपा को दिया बिना लड़े जीत का अवसर, क्या थी वजह?

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नई दिल्ली

दिल्ली की सत्ता गंवा देने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) राजधानी की 'छोटी सरकार' यानि दिल्ली नगर निगम (MCD) से भी दूर हो चुकी है। पिछले एमसीडी चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली 'आप' के हालात इन दिनों ऐसे हैं कि लगातार दूसरे साल पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना लड़े जीत का मौका दे दिया है। पंजाब, गुजरात से गोवा तक में विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने इस साल भी दिल्ली में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। दोनों पदों के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।

आप के पार्षद और विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने कहा, 'हम प्रयास करते तो संख्याबल जुटा सकते थे। कुछ पार्षद मौजूदा व्यवस्था से नाखुश हैं। लेकिन दूसरे दलों की तरह हॉर्स ट्रेडिंग (वोट खरीद-फरोख्त)करने से फायदा नहीं है।' बुधवार को एक पार्टी की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी ने तीन में से केवल एक रिक्त स्टैंडिंग कमिटी के लिए नामांकन दाखिल किया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस सीट पर वह जीत हासिल कर सकती है।

नारंग ने कहा, 'एक बार फिर हमने भाजपा को ना सिर्फ मेयर बल्कि स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बनाने का मौका दिया है, क्योंकि पार्टी किसी भी तरह कमिटी में बहुमत हासिल करने की कोशिश करेगी।'आम आदमी पार्टी ने शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को कमिटी के लिए उतारा है। नारंग ने कहा कि चौधरी अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से इलाके की समस्याओं को उठाते रहे हैं।
मेयर-डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमिटी के लिए 5 पदों पर चुनाव

मेयर और डिप्टी मेयर के अलावा स्टैंडिंग कमिटी के तीन सदस्यों के लिए भी 29 अप्रैल को ही वोटिंग होगी। 31 मार्च को भाजपा के 6 और आप के तीन प्रतिनिधि 18 सदस्यीय समिति से रिटायर हो गए थे। छह सीटों के लिए चुनाव संबंधित जोन में होंगे जहां के प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हुआ है, जबकि तीन का निर्वाचन सदन में होगा। शेष 9 सदस्यों में भाजपा के पांच और आप के चार सदस्य हैं। बुधवार को भाजपा ने भी एक बैठक करके आगामी चुनाव पर मंथन किया। मेयर पद के लिए भाजपा ने बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव, महिपालपुर के इंद्रजीत सहरावत और मौजूदा मेयर राजा इकबाल सिंह पर विचार किया।
मैदान में उतरेगी कांग्रेस

एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी ने मैदान छोड़ने का फैसला किया तो कांग्रेस ताल ठोंकने का दमखम दिखा रही है। कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों के लिए उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सदन में 250 सीटों में से भाजपा के 123 और आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। 15 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी से हैं। यह गुट आप से अलग हुआ था। कांग्रेस के 9 पार्षद हैं जबकि एक फॉर्वर्ड ब्लॉक और एक निर्दलीय है। एक सीट खाली है।
क्या है वोटों का समीकरण

मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में पार्षदों के अलावा दिल्ली के सांसद और विधायक भी हिस्सा लेते हैं। इस हिसाब से भाजपा के पास 141 वोट हैं जबकि आप के पास 106 का संख्याबल है। कांग्रेस के पास दिल्ली से कोई विधायक या सांसद नहीं है। पिछले साल भी आम आदमी पार्टी ने दोनों पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा को बिना लड़े ही जीत का मौका मिल गया था।

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