प्रदेश में 15 जून तक स्कूल शटडाउन: निजी स्कूलों का फैसला, छात्रों की एंट्री पर रोक

छत्तीसगढ़ रायपुर

दुर्ग.

दुर्ग. ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा के बावजूद चुनिंदा निजी स्कूलों द्वारा पिछले दरवाजे से बच्चों की पढ़ाई कराए जाने की शिकायत सामने आई थी। इस पर तत्परता दिखाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित स्कूल प्रबंधकों को नोटिस जारी किया था। नोटिस जारी होते ही प्रबंधकों द्वारा स्पष्टीकरण भेजकर विद्यार्थियों की स्कूल में किसी प्रकार की गतिविधि नहीं होना बताया गया है।

ग्रीष्मकालीन अवकाश में विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर स्कूल प्रबंधकों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा को स्पष्ट किया गया है कि उनकी मंशा शासन के आदेश की अवहेलना की कतई नहीं है। कुछ स्कूल प्रबंधकों ने कहा है कि शाला के विद्यार्थियों को जो कक्षा दसवीं एवं बारहवी में है। उनका ब्रिज कोर्स द्वारा सहयोग करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही सीबीएसई के दसवीं के विद्यार्थी कंपार्टमेंट/ इंप्रूवमेंट परीक्षा में नाम आया है उनको रजिस्ट्रेशन के लिए बुलाया गया था।
उसी प्रकार समर कैंप विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास के लिए सुबह 6 से 8 बजे तक समय निर्धारित कर संचालन करने की रूपरेखा बनाई जा रही थी । जिला शिक्षा अधिकारी के आदेशानुसार इस तरह की सभी गतिविधियों का संचालन निरस्त कर दिया गया है।

प्रदेश में बच्चों की गर्मी छुट्टी शुरू हो गई है। स्कूूल शिक्षा विभाग के इस फैसले से स्कूली बच्चों को बड़ी राहत मिली है। बता दें कि प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। पारा 40 के पार जा रहा है। ( CG Holiday) मौसम विभाग ने आज से लू की चेतावनी जारी की है। ऐसे में बच्चों के सेहत को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 दिन पहले ही स्कूलों में छुट्टी का ऐलान कर दिया है। साय सरकार ने भीषण गर्मी के चलते समय से पहले स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा की है। यह आदेश किसी एक क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए है। सभी सरकारी स्कूल (Government Schools) बंद रहेंगे।

प्राइवेट यानी अशासकीय स्कूलों को भी छुट्टी रखनी होगी। अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर भी यह आदेश सख्ती से लागू होगा। वहीं नए आदेश के अनुसार अब 20 अप्रैल से 15 जून तक प्रदेशभर के स्कूल बंद रहेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। दोपहर की भीषण गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। आपको बता दें कि इस बार छत्तीसगढ़ में गर्मी ने अप्रैल के महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे अभिभावक भी काफी चिंतित थे।

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