मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती 6 वर्ष और 1000 दिन हैं निर्णायक: मंत्री सुश्री भूरिया

मध्य प्रदेश राज्य

मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती 6 वर्ष और प्रथम 1000 दिन है सबसे महत्वपूर्ण : मंत्री सुश्री भूरिया

मध्यप्रदेश में 8वें पोषण पखवाड़ा का हुआ भव्य समापन
पोषण योद्धाओं को किया सम्मानित

भोपाल

प्रदेश में 8वें 'पोषण पखवाड़ा' का समापन गुरूवार को हुआ। इस अवसर पर आई एच एम भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण को लेकर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों को साझा करते हुए कहा कि एक सशक्त राष्ट्र की नींव बच्चों के स्वस्थ बचपन में छिपी है और इसके लिए जीवन के शुरुआती 6 वर्ष सबसे निर्णायक होते हैं।

मंत्री सुश्री भूरिया ने 'मिशन पोषण 2.0' की सफलता पर कहा कि विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि मनुष्य के मस्तिष्क का अधिकांश विकास उसके जीवन के शुरुआती छह वर्षों में ही हो जाता है। ऐसे में गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक के 'प्रथम 1000 दिन' वह सुनहरा कालखंड हैं, जहाँ सही पोषण और उचित देखभाल के जरिए एक मजबूत पीढ़ी का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि एक स्वस्थ माँ ही सुपोषित भविष्य की जननी है।

मंत्री सुश्री भूरिया ने शिशु स्वास्थ्य के बुनियादी सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए कहा कि'कोलोस्ट्रम' यानी माँ के पहले गाढ़े पीले दूध को नवजात का 'पहला टीका' माना जाता है । उन्होंने स्तनपान की सही तकनीक और जन्म से छह माह तक केवल स्तनपान के महत्व पर जोर दिया। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि छह माह की आयु पूर्ण होने के बाद बच्चों को सही समय पर पौष्टिक ऊपरी आहार देना अनिवार्य है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि में कोई बाधा न आए। उन्होंने आधुनिक दौर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए अभिभावकों को सचेत किया कि वे बच्चों का 'स्क्रीन टाइम' यानी मोबाइल और टीवी से दूरी कम करें और उन्हें खेल-आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करें।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि पोषण पखवाड़ा' के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने पूरे देश में जन आंदोलन पोर्टल पर गतिविधियों की प्रविष्टि के मामले में देश भर में तीसरे स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण को दूर करने, स्तनपान को बढ़ावा देने और स्वस्थ आहार के साथ बच्चों के प्रारंभिक विकास पर विशेष बल दिया गया।

मंत्री सुश्री भूरिया ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और कुपोषण निवारण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और कर्मठ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन 'पोषण योद्धाओं' की सक्रियता के कारण ही मध्यप्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति चेतना जागी है।

कार्यक्रम में आयोजित 'पोषण प्रदर्शनी' का अवलोकन करते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाजों और संतुलित आहार के मॉडलों की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल 15 दिनों के आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संतुलित पोषण को हर घर की दैनिक आदत बनाना हमारा साझा लक्ष्य है। समारोह का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने हर बच्चे के मस्तिष्क विकास और सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए निरंतर कार्य करने की शपथ ली।

 

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