गुरुग्राम
गुरुग्राम में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या हो रही है, तो वहीं उचित मंच है जहां इस पर तत्काल सुनवाई कराई जा सकती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि गुरुग्राम में स्थानीय प्रशासन बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ कर रहा है और यह कार्रवाई सुबह 9 बजे से जारी है. उन्होंने कोर्ट से कम से कम चार दिन के लिए यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया.
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है तो उसे वहीं चुनौती दी जानी चाहिए. यह मांग सीधे यहां क्यों लाई गई?’ कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर निर्माण अनाधिकृत हैं और हाईकोर्ट अपने संवैधानिक दायित्व को निभा रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होनी चाहिए.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित निर्माण पूरी तरह वैध हैं और मौके पर परिवार व बच्चे मौजूद हैं, ऐसे में तत्काल राहत जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को दिन में ही हाईकोर्ट के समक्ष मेंशनिंग करने की स्वतंत्रता दे दी.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दोपहर 1 बजे या लंच के तुरंत बाद सुनवाई का अनुरोध किया जा सकता है. अब इस पूरे मामले में अगली अहम सुनवाई हाईकोर्ट में होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
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