लुधियाना
सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने विद्यार्थियों की पढ़ाई की क्वालिटी और सुधारों के उद्देश्य से बड़े बदलाव किए हैं। स्कूलों के पारंपरिक क्लासरूम, जो अब तक केवल चार दीवारी और ब्लैक बोर्ड तक सीमित थे, अब स्किल लैब के रूप में नजर आएंगे। सी.बी.एस.ई. ने सत्र 2026-27 के लिए यह बड़े बदलाव किए हैं जिससे विद्यार्थी किताबी दुनिया से निकलकर जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। नए बदलावों के तहत अब रटने की आदत को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है और पढ़ाई को पूरी तरह प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस किया जाएगा।
बोर्ड ने कक्षा तीसरी से ही आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और कोडिंग को अनिवार्य कर दिया है। विद्यार्थी अब इंटरडिसीप्लिनरी प्रोजैक्ट्स के माध्यम से सीखेंगे कि अलग-अलग विषय एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उदाहरण के तौर पर स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजैक्ट पर काम करते समय वे बजट कैलकुलेशन के लिए मैथ्स, एनर्जी मैनेजमेंट के लिए साइंस और शहरी नियोजन के लिए सोशल साइंस का एक साथ प्रयोग करेंगे। इसके अलावा, 'स्किल सैटरडे' जैसे नवाचारों के जरिए बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी और पब्लिक स्पीकिंग जैसे जीवन कौशल विकसित किए जाएंगे।
परीक्षा का नया पैटर्न : रटने की आदत होगी खत्म
बोर्ड ने परीक्षा के तनाव को कम करने और योग्यता को परखने के लिए इवैल्यूएशन पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया है। अब पेपर में 50 प्रतिशत सवाल कॉम्पिटैंसी यानी योग्यता और व्यावहारिक प्रयोग पर आधारित होंगे। अब किताब के पीछे दिए गए प्रश्नों को रटकर अच्छे मार्क्स लाना मुश्किल होगा। मनोचिकित्सकों के अनुसार, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और इस नए परीक्षा पैटर्न से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और मानसिक तनाव कम होगा।
व्यावहारिक होगी गणित
गणित की जटिलताओं को दूर करने के लिए स्कूलों में 'रियल लाइफ मैथ सिमुलेशन' का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में मिनी मार्कीट बनाए जाएंगे, जहां विद्यार्थी खुद दुकानदार और ग्राहक बनेंगे। इस एक्टिविटी से वे डिस्काऊंट, प्रॉफिट और लॉस जैसे कठिन समीकरणों को रटने के बजाय प्रैक्टिकली हल करना सीखेंगे।
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