करनाल.
हरियाणा सरकार द्वारा आगामी मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति- 2026 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य को औद्योगिक केंद्र बनाने के विजन के साथ तैयार किए जा रहे। इस मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
इसी कड़ी में करनाल कृषि उपकरण निर्माता संघ (पंजीकृत) काइमा और औद्योगिक विकास निगम कल्याण संघ ने सरकार को महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव भेजकर औद्योगिक संपदाओं के प्रबंधन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की अपील की है।
नीति के दायरे को व्यापक बनाने पर जोर
काइमा के अध्यक्ष मनीष गाबा और औद्योगिक विकास निगम कल्याण संघ के अध्यक्ष राज बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि सरकार की प्रस्तावित पहल स्वागत योग्य है, लेकिन इसके लाभ का दायरा केवल उद्योग विभाग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, औद्योगिक नीति के खंड 14.4.6 में उन संपदाओं को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, जो पूर्व में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई थीं और अब हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित या हस्तांतरित कर ली गई हैं।
आइडीसी और एचएसवीपी आवंटियों की साझा कठिनाइयां
एसोसिएशन के महासचिव अक्षय कटारिया द्वारा दिए गए सुझावों में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में उद्योग विभाग द्वारा विकसित औद्योगिक विकास कालोनी और एचएसवीपी से हस्तांतरित संपदाएं एचएसआइआइडीसी की संपदा प्रबंधन प्रक्रिया के अधीन आती हैं। इन संपदाओं के मालिकों को अपने आवंटन पत्र की शर्तों और औद्योगिक प्रबंधन को लेकर कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि नई नीति में एचएसवीपी द्वारा विकसित क्षेत्रों को भी आईडीसी के समान श्रेणी में शामिल किया जाता है, तो सैकड़ों उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी और प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी।
नई नीति से औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख
उद्यमियों का मानना है कि मेक इन हरियाणा नीति का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब सभी औद्योगिक क्लस्टर एक समान नियमों के तहत काम करें।
यह है संघ की मांग
- उद्योग विभाग द्वारा विकसित आइडीसी को उनके आवंटन पत्र की मूल शर्तों के तहत नीति में जगह मिले।
- एचएसआइआइडीसी द्वारा अधिग्रहित पुरानी संपदाओं के लिए नियम सरल किए जाएं।
- प्रस्तावित नीति निवेश और रोजगार के साथ-साथ ईज आफ डूइंग बिजनेस के मूल मंत्र पर आधारित हो।
बता दें कि सरकार ने नीति का मसौदा सार्वजनिक कर उद्योगपतियों से इनपुट मांगे हैं। करनाल के इन प्रमुख औद्योगिक संघों द्वारा दिए गए सुझावों पर अब राज्य स्तर पर चर्चा होने की उम्मीद है। यदि सरकार इन सुझावों को स्वीकार करती है, तो यह प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
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