एयर इंडिया का नया प्लान: कम होंगी सेवाएं, टिकट की कीमतों में आएगी गिरावट

बिज़नेस

नई दिल्ली
मौजूदा संकट के बीच एयर इंडिया की तरफ से ग्राहकों को बड़ी राहत दी जा सकती है। एयर इंडिया छोटी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में भोजन की व्यवस्था वैकल्पिक बनाने का विचार करने जा रहा है। ऐसे में अगर कोई पैसेंजर खाना का विकल्प नहीं चुनता है तब की स्थिति में टिकट का किराया 250 रुपये तक कम हो सकता है। दी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए अन्य कई फैसले ले सकती है। कंपनी में इसको लेकर काफी मंथन चल रहा है।

एक सुविधा देने पर विचार कर रही है कंपनी
रिपोर्ट के अनुसार खाना का चयन ना करने पर पैसेंजर्स को सस्ता एयर इंडिया का टिकट मिल जाएगा। कंपनी इसके अलावा बिजनेस क्लास के पैसेंजर्स के लिए लाउंज एक्सेस अनबंडलिंग करने की तैयारी भी कर रही है। मौजूदा समय में लाउंज ऑपरेटर्स मेट्रो सिटी में 1100 रुपये से 1400 रुपये तक और नॉन मेट्रो शहर में 600 रुपये से 700 रुपये तक वसूल रहे हैं। औसतन 1000 रुपये एक लाउंज एक्सेस पर खर्च होता है। बहुत से बिजनेस क्लाइस की फ्लाइट्स काफी तेजी के ऑपरेट होती हैं। ऐसे में कई बार पैसेंजर एयरपोर्ट पर लाउंज एक्सेस नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यह सुविधा अगर हटती है तो टिकट का किराया कम हो जाएगा।

मामले की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार, “एयर इंडिया पहले दिन से ही भोजन को टिकट में जोड़ती आ रही है। लेकिन अब एविएशन टरबाइन फ्यूल का रेट बढ़ने और रुपये की कीमत घटने की वजह से हवाई जहाज का रेट बढ़ गया है। भारत एक प्राइस सेसंटिव देश है। ऐसे में कीमतें अधिक होने की स्थिति में पैसेंजर्स ट्रेन या रोड का विकल्प चुन सकते हैं। जिसकी वजह से कंपनी इस भोजन की व्यवस्था पर विचार कर रही है।”

जुलाई से एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट्स में होगी कटौती
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया जुलाई के महीने से इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती करेगा। कंपनी बढ़ते तेल के खर्च और हवाई पाबंदियों की वजह से यह फैसला लेने के लिए मजबूर है। मौजूदा समय में एयर इंडिया घाटे में चल रही है। वित्त वर्ष 2026 में एयर इंडिया को 22000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

शुक्रवार को कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव और एमडी Campbell Wilson ने कहा, “हमने ने अप्रैल और मई के महीने में कुछ फ्लाइट्स की कटौती की है। इसके पीछे की वजह बढ़ता तेल का खर्च और एयरस्पेस की पाबंदियां हैं। जिसके कारण हमारी इंटरनेशनल फ्लाइट्स मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं।”

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