निजी शिक्षण संस्थानों पर गिरी गाज, अनियमितता पर कार्रवाई

राज्य

मुजफ्फरपुर

राज्य में सरकारी योजनाओं का लालच देकर निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा मुनाफा कमाने और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर के तीन निजी शिक्षण संस्थानों के नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

हायर एजुकेशन के लिए दिया जाता है लोन
सरकार की इस योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जिसे पढ़ाई पूरी होने के एक साल बाद चुकाना होता है। यदि छात्र को नौकरी या रोजगार नहीं मिलता है तो भुगतान के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाता है। लेकिन कई निजी संस्थान इस सुविधा का गलत फायदा उठा रहे हैं। उनके होर्डिंग और बैनरों पर भी इस योजना का लाभ मिलने का दावा किया जाता है, जिससे छात्र आकर्षित होते हैं।

तीन निजी शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई
इसी क्रम में बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के तीन निजी शिक्षण संस्थानों एमपीएस कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन,शिवि कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन और देव कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन के नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

नियम के खिलाफ फायदा उठाने की कोशिश
यह कार्रवाई सत्र 2025-26 में निर्धारित सीट से अधिक बोनाफाइड जारी करने और संतोषजनक जवाब नहीं देने के कारण की गई है। विभाग को शिकायत मिली थी कि कई संस्थानों ने तय सीमा से अधिक छात्रों का नामांकन दिखाकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की। इसके अलावा, MNSSBY पोर्टल पर आवेदनों की स्वीकृति प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई।

सवालों के जवाब नहीं दे सके कॉलेज
जांच के दौरान जब संबंधित संस्थानों से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो संस्थान स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे, जिससे पूरी प्रक्रिया संददेह के घेरे में आ गई। विभाग ने साफ किया है कि जिन संस्थानों ने अनियमित तरीके से नामांकन किया है, उनके नए आवेदनों के भुगतान पर रोक जारी रहेगी। हालांकि, जिन छात्रों की एक किस्त पहले ही जारी हो चुकी है, उनकी आगे की किस्त मिलती रहेगी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

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