रांची
वन भूमि पर जल स्तर बरकरार रखने के लिए करीब छह हजार कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। पहाड़ियों से उतरने वाली नलिकाओं को जगह-जगह बांधकर ये चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इससे भूमि के ऊपर तो जल मौजूद रहेगा ही, भूगर्भ जल भी रिचार्ज होगा।
बांधवगढ़ वन क्षेत्र में यह प्रयोग करने वाले केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों के लिए यह आसानी से उपलब्ध होने वाला जलस्रोत होगा। मिट्टी में नमी रहने से हरियाली बढ़ेगी और राज्य के जंगलों में बायोमास की वृद्धि दर्ज की जाएगी।
बरसात से पहले ये चेकडैम तैयार कर लिए जाएंगे। त्रिवेदी ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में पहले से हजारों की संख्या में ऐसे चेकडैम बने हुए हैं। इनकी पहचान कर मरम्मत भी कराई जाएगी।
एक लाख मिलियन जल भंडार बढ़ेगा
पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि राज्य में इस तरह के प्रयोग से एक लाख मिलियन लीटर जल की उपलब्धता बढ़ेगी। वाटर रिचार्ज की वजह से यह जल स्थायी तौर पर जमीन के ऊपर मौजूद रहेगा।
नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक वाटर रिचार्ज संरचना अतिक्रमण या वृक्ष कटाई की वजह से नष्ट हो गई है। नए तरीके से कच्चे चेकडैम बनाकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है।
आजीविका का भी बनेगा साधन
जंगलों में बने ये वाटर रिचार्ज पिट मछली पालन के लिए भी उपयोगी होंगे। इससे ग्राम समितियों को जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वन क्षेत्र में पहले से बड़े बांध बने हुए हैं और वहां मछली पालन हो रहा है। अब कच्चे चेकडैम में भी जल्द विकसित होने वाली मछली की प्रजाति डाली जाएगी।
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