राजस्थान में डिग्री रैकेट का खुलासा, कई विश्वविद्यालय भी जांच के घेरे में

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चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री मामले की जांच में नए तथ्यों के खुलासे हुए हैं. राजस्थान सरकार ने अवैध पीएचडी डिग्रियों की लिस्ट तैयार करना शुरू कर दिया है. 425 अवैध पीएचडी डिग्रियों की जांच के बाद यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है. एसओजी पूरे फर्जी डिग्री रैकेट और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है. एसओजी को संदेह है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कई अन्य विश्वविद्यालयों की  भी फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई गई है.

10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
आरपीएससी की प्राध्यापक भर्ती-2022 में लगाई गई फर्जी डिग्री के सत्यापन के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ. बताया जा रहा है कि कमला कुमारी नामक महिला अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत डिग्री जांच में फर्जी पाई गई थी. इसके बाद एसओजी ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और पूर्व प्रेसिडेंट भी शामिल हैं.

सरकारी नौकरी में जमकर हुआ फर्जी डिग्री का इस्तेमाल
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों डिग्रियां बेची गईं. आरोपियों ने फर्जी पीएचडी, एमए और अन्य डिग्रियां तैयार कर उसे स्टूडेंट्स को बेचा. आशंका है कि इन डिग्रियों के जरिए कई अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली. मामले में मास्टरमाइंड आरोपी वीरेंद्र सिंह पवार से पूछताछ में अब यह खंगाला जा रहा है कि कितने फर्जी डिग्री होल्डर है और कितने लोग नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है. साथ ही ऐसी कितनी प्रिंटिंग प्रेस है, जहां पर फर्जी डिग्री छपवाई गई उसकी भी लिस्ट तैयार की जा रही है.  

सीएम से शिकायत करने की बात कह चुके हैं किरोड़ीलाल मीणा
पहली बार नहीं है, जब किरोड़ीलाल मीणा खफा नजर आ रहे हैं. पिछले साल, वो खुद अपनी टीम के साथ गए थे और जो 200 से अधिक अभ्यर्थियों की कॉपियां सीज करके ले गए. किरोड़ी लाल मीणा ने SOG की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि एसओजी तमाशा कर रही है और यह अब तमाशा नहीं चलेगा. इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी.

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