ईरान-इजरायल विवाद पर ब्रिक्स बैठक में टकराव, साझा बयान जारी नहीं हुआ

देश

नई दिल्ली

ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं।

दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी।

गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई।

जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात
ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।

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