अबूझमाड़ में बदलाव की नई कहानी, नक्सली बंदिशों के बावजूद ग्रामीणों ने बढ़ाया सरकारी व्यवस्था पर भरोसा

छत्तीसगढ़ रायपुर

नारायणपुर.

कभी नक्सलियों की दहशत, बंदूक की छाया और बाहरी दुनिया से कटे रहने के लिए पहचाना जाने वाला अबूझमाड़ अब धीरे-धीरे बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिन गांवों में वर्षों तक मोबाइल रखना, सरकारी दस्तावेज बनवाना और प्रशासन से संपर्क रखना तक गुनाह माना जाता था, वहां अब ग्रामीण खुद आगे बढ़कर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रहे हैं।

नारायणपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे माड़ मैत्री अभियान के तहत जिला मुख्यालय में आयोजित ड्राइविंग लाइसेंस शिविर में यह बदलाव साफ तौर पर देखने को मिला। शिविर में 300 से अधिक ग्रामीण पहुंचे, जिनमें अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लोग और आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल रहे। शिविर की सबसे खास तस्वीर तब सामने आई, जब अबूझमाड़ के पदमकोट गांव से युवा गजानंद वड्डे लाइसेंस बनवाने पहुंचा। गजानंद ने बताया कि उसके गांव में वर्षों तक नक्सलियों का प्रभाव इतना गहरा था कि लोग सरकारी योजनाओं से दूर रहते थे।

गांव में मोबाइल रखने, पहचान पत्र बनवाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शामिल होने पर नक्सलीयों द्वारा रोक जैसी स्थिति थी। गजानंद ने बताया कि गांव में पुलिस कैंप खुलने के बाद हालात बदलने लगे हैं। अब ग्रामीणों में डर कम हुआ है और लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने गांव का पहला युवा है, जिसके पास मोटरसाइकिल है और अब वह उसका वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जिला मुख्यालय पहुंचा है।

लाइसेंस बनवाने आत्मसमर्पित नक्सली भी पहुंचे शिविर
शिविर में एक और भावुक तस्वीर तब देखने को मिली, जब 10 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी लाइसेंस बनवाने पहुंचे। इनमें आत्मसमर्पित नक्सली अरब भी शामिल था। उन्होंने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पहले जंगल और हिंसा की जिंदगी के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आता था, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगा। उसे रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिससे उसने मोटरसाइकिल खरीदी और अब वह कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए लाइसेंस बनवा रहा है।

अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे शिविर : एसपी
एक समय ऐसा था जब नक्सली संगठन युवाओं के हाथों में हथियार थमाते थे, लेकिन अब वही युवा रोजगार, पहचान और सामान्य जीवन की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। नारायणपुर एसपी रॉबिंसन गुड़िया ने बताया कि माड़ मैत्री अभियान के तहत लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय में आयोजित इस शिविर में अबूझमाड़ के कई गांवों से ग्रामीण पहुंचे हैं। 300 से अधिक लोग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए हैं। एसपी ने कहा कि कई ऐसे ग्रामीण भी शिविर में पहुंचे हैं, जिनके गांव में पहली बार किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस बनने जा रहा है। आने वाले समय में भी ऐसे शिविर अलग-अलग इलाकों में लगाए जाएंगे, ताकि दूरस्थ गांवों के लोग शासन की सुविधाओं और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ सकें।

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