भोजशाला फैसले के बाद बढ़ी हलचल, अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा चर्चा में

राज्य

अजमेर

अजमेर में स्थित ऐतिहासिक अढ़ाई दिन का झोंपड़ा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यहां स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा पाठ की परमिशन मांगी है. महाराणा प्रताप सेना ने जिला कलेक्टर को मेल कर अगले मंगलवार (19 मई) के लिए अनुमति की मांग की है. संगठन के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने कहा कि हम शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन कराना चाहते हैं. परमान का दावा है कि अढ़ाई दिन का झोपड़ा केवल एक ऐतिहासिक संरचना नहीं, बल्कि प्राचीन संस्कृत कंठाभरण विद्यालय और हिंदू मंदिर का स्वरूप रहा है.

"भोजशाला के फैसले से आस्था मजबूत हुई"
मेल में लिखा, "परिसर की दीवारों और स्थापत्य में मौजूद शिल्प और ऐतिहासिक साक्ष्य इसकी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं. मध्यप्रदेश की भोजशाला से जुड़े न्यायालय के फैसले से सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को मजबूती मिली है." बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है. शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिसर पहुंचे थे और हनुमान चालीसा का पाठ और पूजा संपन्न हुई.

संगठन का दावा- कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी
साथ ही महाराणा प्रताप सेना ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित हनुमान चालीसा पाठ पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा. किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है.

12वीं सदी की धरोहर देश-विदेश में विख्यात
गौरतलब है कि ढाई दिन का झोपड़ा अजमेर की सबसे प्राचीन और चर्चित ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है. इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में माना जाता है. इंडो-इस्लामिक वास्तुकला, विशाल मेहराबों, नक्काशीदार स्तंभों और प्राचीन शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है. देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry