फरीदकोट में गिरफ्तारी के बाद बवाल, नामांकन विवाद को लेकर कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

राज्य

फरीदकोट.

नगर कौंसिल चुनाव के दौरान नामांकन रद होने के मामले को लेकर फरीदकोट में बुधवार रात को राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया। शिरोमणि अकाली दल द्वारा वीरवार को शहर बंद का आह्वान किया गया, जिसे व्यापारियों और आम लोगों का व्यापक समर्थन मिला। शहर के कई बाजारों में दुकानें बंद हैं और अकाली कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गुरुद्वारा खालसा दीवान में एकत्रित हुए हैं।

यहां से कार्यकर्ताओं ने थाना सिटी फरीदकोट के घेराव की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के भी दोपहर फरीदकोट पहुंचने की सूचना है, जिससे माहौल और अधिक गरमा सकता है। दरअसल, बुधवार देर रात शिरोमणि अकाली दल के जिला शहरी प्रधान सतीश ग्रोवर को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में अकाली कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय के बाहर जमा होने लगे और सतीश ग्रोवर की रिहाई की मांग उठाने लगे। कई स्थानों पर पुलिस और अकाली कार्यकर्ता आमने-सामने डटे दिखाई दिए।

नामांकन रद होने से पैदा हुआ विवाद
उल्लेखनीय है कि नगर कौंसिल चुनाव के नामांकन रद होने के मामले को लेकर गत दिनों भी भारी हंगामा हुआ था। बुधवार को यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब विधायक गुरदित सिंह सेखों और शिअद उपाध्यक्ष परमबंस सिंह रोमाणा ने अलग-अलग प्रेस वार्ताएं कर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक गुरदित सिंह सेखों ने प्रेस वार्ता में कहा कि चुनाव पूरी अनुशासन व्यवस्था के साथ करवाए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाने और गुंडागर्दी करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि जिन प्रत्याशियों के नामांकन रद हुए हैं, उन्होंने सरकारी करों की चोरी की थी और किसी भी वैध नामांकन को रद नहीं किया गया। विधायक ने यह भी कहा कि कुछ नेताओं ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को धमकियां दी हैं, जिसकी शिकायत चुनाव आयोग को भी भेजी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव प्रक्रिया में खलल डालने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

रोमाणा ने सत्ता पक्ष पर किया पलटवार
दूसरी ओर परमबंस सिंह रोमाणा ने देर शाम प्रेस वार्ता कर सत्ता पक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल और अन्य विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के नामांकन कथित रूप से सत्ताधारी नेताओं के दबाव में रद करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि वकीलों की मदद और कानूनी दलीलों के आधार पर उनके प्रत्याशियों के नामांकन स्वीकार करवाए गए। रोमाणा ने कहा कि अब सत्ता पक्ष प्रशासन पर दबाव बनाकर उन पर सरकारी काम में बाधा डालने के मामले दर्ज करवाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यदि उन पर मामले दर्ज भी किए जाते हैं तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे और अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

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