सुकमा में पंचायत उपचुनाव ने गरमाई राजनीति, सरपंच पदों के लिए बन रहे नए समीकरण

छत्तीसगढ़ रायपुर

सुकमा.

छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग की घोषणा के साथ सुकमा जिले में त्रिस्तरीय पंचायत उप-चुनाव की औपचारिक शुरुआत हो गई है। ग्रामीण राजनीति के इस अहम पड़ाव में अब चुनावी हलचल तेज हो चुकी है और पंचायत स्तर पर नई राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं।

जिले में नगरीय निकायों में कोई पद रिक्त नहीं होने के कारण प्रशासन और राजनीतिक गतिविधियों का पूरा फोकस ग्रामीण पंचायत क्षेत्रों पर केंद्रित हो गया है। इस उप-चुनाव में जिले की तीन ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए सीधा मुकाबला होगा। इनमें सुकमा जनपद पंचायत का गोलाबेकूर, छिंदगढ़ जनपद पंचायत का रोकेल और कोंटा जनपद पंचायत का सिलगेर शामिल हैं। इसके अलावा जिले में कुल 21 पंच पदों के लिए भी मतदान कराया जाएगा। इन सीटों पर चुनावी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और संभावित उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों के साथ मतदाताओं तक पहुंचना शुरू कर चुके हैं।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री शबाब खान के अनुसार चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित की जा रही है। चुनाव अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है और नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सबसे अहम चरण उम्मीदवारों की अंतिम सूची और चुनाव प्रचार का माना जा रहा है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 21 मई को नाम वापसी की अंतिम तिथि और उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। इसके बाद चुनावी मुकाबला पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा। 1 जून को मतदान होगा और 4 जून को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर यह चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का नहीं बल्कि गांवों के विकास, नेतृत्व और भविष्य की प्राथमिकताओं को तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल –
1. जिन पंचायतों में उप-चुनाव हो रहे हैं, वहां पूर्व में पद रिक्त होने के वास्तविक कारण क्या रहे और क्या उन कारणों पर कोई सार्वजनिक समीक्षा की गई?
2. क्या प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कोई अलग रणनीति तैयार की है, खासकर दूरस्थ इलाकों में?
3. पंचायत चुनाव को स्थानीय विकास का आधार बताया जा रहा है, लेकिन क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों के कामकाज की बाद में जवाबदेही तय करने के लिए कोई सार्वजनिक मूल्यांकन तंत्र मौजूद है?

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