प्रयागराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल करने के मामले में शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा छह मई 2026 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को तदर्थ सेवाओं का लाभ देने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय से प्रभावित शिक्षकों को सीधा लाभ होगा। उन्हें हाई कोर्ट के इस निर्णय का फायदा पेंशन में मिलेगा।
रमेश सिंह चौहान और तीन अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी संपूर्ण सेवा अवधि, जिसमें तदर्थ सेवाकाल भी शामिल है, को पेंशन, चयनित ग्रेड और पदोन्नति संबंधी लाभों की गणना में जोड़ने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके दावे को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के दायरे में है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि तदर्थ सेवाओं को पेंशन प्रयोजन के लिए मान्य करने का मुद्दा पहले ही नंद लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में तय हो चुका है।
अदालत ने माना कि वर्तमान मामला पूर्व में दिए गए निर्णयों से पूरी तरह आच्छादित है। इसके बाद कोर्ट ने उप शिक्षा निदेशक को तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर पेंशन की पुनर्गणना करने, समस्त बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के दो महीने के भीतर पूरी कार्रवाई संपन्न करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया। जाहिर है कि इस आदेश के बाद अब संबंधित शिक्षकों की तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को भी पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल किया जाएगा।
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