मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं की नजर हाई कोर्ट पर, OBC आरक्षण विवाद में 24 जून से तेज होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश राज्य

 जबलपुर
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और सात वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले में अब सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने मामले की गंभीरता और इससे प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए 24 जून 2026 से प्रतिदिन सुनवाई (डे-टू-डे हियरिंग) करने का फैसला लिया है।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की विशेष युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ओबीसी आरक्षण विवाद से संबंधित 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण सूचीबद्ध थे।

सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय से मुख्य याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने वैकल्पिक रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के संदर्भ में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने से जुड़े लंबित आवेदनों पर विचार करने की मांग भी रखी।

अधिवक्ता ठाकुर ने दलील दी कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में शासकीय नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी करीब सात साल से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मामले का शीघ्र निराकरण आवश्यक है।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली बार उनके समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का समुचित अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने व्यापक और बहुस्तरीय विवाद का न्यायसंगत समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएं।

इसी को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि नियमित सुनवाई से लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है और नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।

    ओबीसी आरक्षण विवाद से राज्य की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं, चयन सूचियां व हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, अब निगाहें जाहिर तौर पर 24 जून पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की नियमित सुनवाई आरंभ करेगा। उम्मीद की जा रही है कि लगातार सुनवाई से वर्षों से लंबित इस संवेदनशील संवैधानिक विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति हो सकेगी।

    -संदीप जैन, अधिवक्ता, मप्र हाई कोर्ट।

 

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