बहराइच
मोगली गर्ल यानी एहसास। अब दुनिया छोड़ गई। नौ साल पहले बंदरों के झुंड से घिरी एक 10 साल की बच्ची को वनकर्मियों ने बचाया था। बंदरों जैसी आवाज, पैर से खाना खाने की आदत और कपड़े न पहनने की शगल ने ही उसको मोगली गर्ल बनाया था। 15 जून को उसकी मौत की खबर पाकर एक बार फिर वर्ष 2017 की तस्वीर लोगों के सामने आ गई, जब वह देश के नामचीन अखबारों की सुर्खियां ही नहीं बनी थी।
कतर्निया सेंचुरी के मोतीपुर रेंज के नैनिहा गांव के पास गश्त के दौरान तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरेश कुमार ने एक 10 साल की बच्ची को बंदरों के झुंड के बीच देखा था। वह लड़की नंगी थी, नाखून-बाल बढ़े थे, दोनों हाथ-पैर से चलती थी और बंदरों की तरह चिल्लाती-गुर्राती थी। बंदरों ने उसे बचाने आए ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे झुंड से निकाला। सामान्य जीवन जीने की कला सीख रही मोगली गर्ल का नौ साल बाद जिंदगी का सफर 15 जून को खत्म हो गया। वर्ष 2017 में जंगल से निकली बच्ची मोगली गर्ल शरीर पर खरोंचों के निशान थे।मिहीपुरवा सीएचसी से रेफर कर उसे बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आम लोगों की भाषा नहीं समझती थी मोगली गर्ल
तत्कालीन सीएमएस रहे डॉ डीके सिंह ने बताया कि वह न भाषा समझती थी, न थाली में खाना खाती थी, बल्कि जमीन पर फैलाकर बंदरों की तरह उठाकर खाती थी। लिहाजा उसे मोगली गर्ल का नाम मिला था। इलाज करने वाले नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ एसके वर्मा बताते हैं कि पहली बार ऐसा मामला उनके सामने आया था। सारे अंग विकसित थे, लेकिन उसके हाव-भाव पूरी तरह से बंदरों जैसे थे। हालाकि यहां से जाने के बाद उसके भाषा, व्यवहार और शिक्षा पर काम हुआ। धीरे-धीरे उसने बोलना सीखा, कपड़े पहनना सीखा और सामान्य जीवन जीने लगी। लेकिन जब उन्हें भी यह जानकारी मिली कि उस बालिका की मौत हो गई तो वे भी हैरान रह गए।
सांस की बीमारी से जूझ रही थी जंगल में मिली लड़की
वैसे डॉ अनूप कुमार बताते हैं कि जंगल में वर्षों रहने का असर उसके फेफड़ों पर पड़ा था। जैसा की जानकारी सामने आई है कि लंबे समय से वह सांस की बीमारी से जूझ रही थी। दो दिन पहले लखनऊ में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची को वनकर्मियों ने मौत के मुंह से निकाला था, वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ते-जुड़ते दुनिया छोड़ गई। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ संजय खत्री कहते है कि ऐसी घटनाएं हमेशा समाज में एक नई सीख देती है। एहसास की कहानी मानवता और प्रकृति के रिश्ते का सबसे अनोखा उदाहरण मानी जाएगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
