नूरपुरबेदी/चंडीगढ़.
पंजाब के नूरपुरबेदी में पिछले 25 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे मनरेगा कर्मचारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार ने इन हड़ताली कर्मचारियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के उद्देश्य से ‘काम नहीं, तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत लागू करते हुए हड़ताल के दिनों का वेतन काटने का सख्त फरमान जारी किया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रशासनिक सचिव के निर्देश पर डिप्टी डायरैक्टर द्वारा सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और समन्वयकों को ये आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस फैसले की जानकारी मिलते ही नूरपुरबेदी में धरने पर बैठे कर्मचारियों में भारी रोष फैल गया और उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना कड़ा विरोध जताया।
कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा 1 जुलाई को सुबह 11 बजे जत्थेबंदी के साथ बैठक तय की गई थी। लेकिन इस प्रस्तावित बातचीत से ठीक पहले वेतन काटने के आदेश जारी करना सरकार की बौखलाहट को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें पंचायत विभाग में मर्ज करके नियमित किया जाए, जिसे सरकार लंबे समय से गंभीरता से नहीं ले रही है। कर्मचारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में जन मिलनियों के दौरान विधायकों, हलका इंचार्जों और मंत्रियों का घेराव किया जाएगा।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि विभागीय अफसरशाही के रवैये ने कर्मचारियों के भीतर गुस्से की आग को और भड़का दिया है और अब वे किसी भी झूठे आश्वासन से रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चाहे उन पर लाठीचार्ज किया जाए, मुकदमे दर्ज हों या जेल भेजा जाए, मनरेगा कर्मचारी अपना हक लेकर ही रहेंगे। जिला प्रधान कुलदीप सिंह, सतनाम सिंह, जसपाल सिंह और अन्य मौजूद कर्मचारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष और हड़ताल इसी तरह जारी रहेगी।
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