चंडीगढ़.
हरियाणा की नायब सरकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों लोगों को मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके लिए हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली तथा हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों का दौरा करेगी।
यह टीम इन राज्यों में जाकर यह पता करेगी कि वहां गरीबों को राशन वितरण करने की व्यवस्था का संचालन कैसे होता है तथा बीपीएल व अंत्योदय श्रेणी में आने वाले लोगों को क्या-क्या तथा कितनी मात्रा में खाद्य वस्तुएं वितरित की जाती हैं। रिपोर्ट आने के बाद अगर इन राज्यों में गरीब लोगों को कुछ अतिरिक्त खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं तो वैसी ही व्यवस्था हरियाणा सरकार भी अपनी वितरण सामग्री में जोड़ सकती है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को अध्ययन कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने तीन दिन पहले ही सभी जिलों के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों के साथ हुई आनलाइन बैठक में यह निर्देश जारी किए हैं।
सरकार क्यों उठा रही है ये कदम?
प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड प्रणाली को बल देने के लिए यह कदम उठा रही है। प्रदेश में बीपीएल तथा अंत्योदय श्रेणी के करीब 40 लाख कार्ड बने हुए हैं। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत हर माह करीब 1.57 करोड़ लाभर्थियों को राशन दिया जा रहा है। इनमें 2.86 लाख अंत्योदय परिवार तथा 37.14 लाख बीपीएल परिवार शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अंत्योदय परिवार को 35 किलो और बीपीएल परिवारों को प्रति सदस्य पांच किलो गेहूं निश्शुल्क दिया जाता है। सरसों का तेल तथा चीनी भी रियायती दर पर दिए जाते हैं। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया कुछ राज्यों में चना तथा दाल देने की बात सामने आई है। इसके चलते ही उन्होंने दूसरे राज्यों की वितरण प्रणाली का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
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